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ऑस्ट्रिया ने संभाली यूरोपीय अध्यक्षता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्ट्रिया ने यूरोपीय संघ की हर साल बदलती अध्यक्षता संभाल ली है और साल 2005 के अध्यक्ष ब्रिटेन से कुछ अलग रास्ता अपनाने की बात कही है. ऑस्ट्रिया के चांसलर वोल्फ़गैंग शुएस्सेल ने संकेत दिया है कि वह यूरोपीय संघ के देशों में श्रम बाज़ार को और उदार बनाने के लिए वह ब्रितानी प्रस्ताव के असर को कम करने की कोशिश करेंगे. चांसलर ने यह भी कहा है कि वह एक सप्ताह में 48 घंटे तक काम करने की नीति से ब्रिटेन के बाहर रहने की स्थिति को भी चुनौती देंगे और सामान्य कृषि नीति में सुधारों की ब्रितानी प्रधानमंत्री की माँग का भी विरोध करेंगे. यूरोपीय संघ के विस्तार के बारे में ऑस्ट्रिया की अनिश्चित राय रही है और वह तुर्की को संघ में शामिल किए जाने के बारे में हो रही बातचीत का भी विरोधी रहा है. संविधान ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति रींज़ फ़िशर ने बीबीसी के साथ बातचीत में विश्वास व्यक्त किया है कि नए वर्ष में यूरोपीय संविधान के लिए कोई और ठोस क़दम नहीं उठाए जाएंगे और इस मुद्दे पर सघन बातचीत जारी रहेगी. फ़िशर ने कहा कि वह निजी रूप से एक यूरोपीय संविधान के समर्थक रहे हैं क्योंकि इससे 25 देशों के एक विशाल संगठन का संचालन करने में आसानी होगी. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों की बदलती राय का यह दौर अन्य बारह महीने तक जारी रहने की संभावना है. फ़िशर ने कहा कि यूरोप ने पहले ही अपना काम करना शुरू कर दिया है लेकिन यूरोपीय संघ को लोगों की राय को भी अहमियत देनी होगी. ग़ौरतलब है कि नीदरलैंड और फ्रांस में हुए जनमत संग्रह में लोगों ने यूरोपीय संविधान को नामंज़ूर कर दिया और ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति का कहना है कि यह राय सिर्फ़ कोई इत्तेफ़ाक नहीं है. फ़िशर ने कहा कि वह ऑस्ट्रिया बुल्गारिया और रोमानिया को यूरोपीय संघ में शामिल करने और क्रोएशिया को शामिल के वास्ते बातचीत शुरू करने का हिमायती रहा है लेकिन तुर्की के साथ बातचीत काफ़ी पेचीदा रही है और बातचीत के नतीजे का भी अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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