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स्विटज़रलैंड में जीएम फ़सलों पर मतदान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
स्विट्ज़रलैंड में जैविक रूप से बदलाव करके उगाई गई फ़सलों (जीएम फ़सलों) पर पाँच साल की पाबंदी लगाने के मुद्दे पर आज मतदान हो रहा है. इस जैविक रूप से बदलाव करके तैयार की जाने वाली फ़सलों का विरोध करने वाले प्रस्ताव को बहुत से किसानों ने तैयार किया है. उनका कहना है कि ऐसी फ़सलों पर पाबंदी लगाने से यह पता लगाने के लिए और समय मिल जाएगा कि इनसे क्या-क्या नुक़सान होता है. लेकिन देश का प्रभावशाली जैव प्रोद्योगिकी उद्योग जगत इस प्रस्ताव के विरोध में प्रचार कर रहा है. जैव प्रोद्योगिकी उद्योग जगत का कहना है कि स्विट्ज़रलैंड को नई तकनीक से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए नहीं तो स्वदेश में होने वाले वैज्ञानिक शोध पर इसका असर पड़ सकता है. उपभोक्ता बहिष्कार स्विटज़रलैंड में जैविक रूप से बदलाव करके तैयार की गई फ़सलों की गुणवत्ता के बारे में शुरू से ही चिंतित रहे हैं और अभी तक उनका विरोध ही होता रहा है. स्विटज़रलैंड की ज़मीन पर जैविक रूप से बदलाव करके तैयार की गई गेहूँ की क़िस्म अभी सिर्फ़ प्रयोग के तौर पर बहुत थोड़ी सी ज़मीन पर उगाई गई है. और वह भी ज़्यूरिख़ विश्वविद्यालय में प्रयोग कर रहे वैज्ञानिकों ने उगाई है. स्विटज़रलैंड के बहुत से किसान इस तरह की फ़सल को दूर ही रखना चाहते हैं. सर्वेक्षणों में दिखाया गया है कि वहाँ के उपभोक्ता भी जैविक रूप से बदलाव करके तैयार की गईं फ़सलों की पैदावार को नहीं ख़रीदना चाहते. यूरोपीय संघ ने जैविक रूप से बदलाव करके तैयार की गई फ़सलों पर इकतरफ़ा तौर पर जो रोक लगाई थी उसे 2004 में हटा लिया था. स्विटज़रलैंड हालाँकि यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है लेकिन उस पर भी इस तरह की फ़सलों पर लगी पाबंदी हटाने के लिए दबाव बढ़ रहा है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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