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यासिर अराफ़ात को याद किया गया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दशकों तक फ़लस्तीनी संघर्ष के प्रतीक बने रहे यासिर अराफ़ात की मौत की वर्षगाँठ पर उन्हें याद किया गया. यासिर अराफ़ात का 75 साल की अवस्था में 11 नवंबर 2004 को निधन हो गया था. अराफ़ात के निधन की पहली वर्षगाँठ के मौक़े पर पश्चिमी तट के रामल्ला में उनके नाम पर बनाए जाने वाले एक संग्रहालय की बुनियाद रखी गई. इस समारोह में फ़लस्तीनी नेताओं के अलावा कुछ राजनयिकों ने भी हिस्सा लिया और समारोह का नेतृत्व यासिर अराफ़ात के उत्तराधिकारी महमूद अब्बास ने किया. इस अवसर पर सभी ने यासिर अराफ़ात के संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया. महमूद अब्बास ने कहा, "यासिर अराफ़ात ने जो रास्ता शुरू किया और जिस रास्ते पर चलते हुए उन्होंने अनेक क़ुर्बानियाँ दीं, हम उस पर चलते रहने का संकल्प दोहराते हैं." यासिर अराफ़ात ने 1965 में जिस फ़तेह संगठन की बुनियाद रखी थी उसने शनिवार को ग़ज़ा पट्टी में एक रैली निकाली. फ़तेह संगठन ही इस समय फ़लस्तीनी प्रशासन में सत्तारुढ़ है. यासिर अराफ़ात की मौत की परिस्थितियों के बारे में एक साल बाद भी तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. फ़लस्तीनी मंत्रिस्तरीय जाँच इस बारे में किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी लेकिन उस जाँच में कहा गया था कि यासिर अराफ़ात की मौत कैंसर, ज़हर देने या एड्स से नहीं हुई. येरूशलम में बीबीसी संवाददाता एलन जोन्स्टन का कहना है कि यासिर अराफ़ात की मौत के एक साल बाद भी उनकी परंपरा को जारी रखने के बारे में तर्क-वितर्क जारी हैं. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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