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मिलर ने जूरी के सामने गवाही दी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक पत्रकार जूडिथ मिलर ने उस जूरी के सामने अपनी गवाही दी है जो इस मामले की जाँच कर रही है कि क्या सीआईए के एक एजेंट का नाम व्हाइट हाउस ने लीक किया था. मिलर ने जुलाई में इस मामले में गवाही देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद उन्हें तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई गई थी. लेकिन जेल में 85 दिन काटने के बाद ही उन्हें शुक्रवार को रिहा कर दिया गया था और उन्होंने कहा था कि वे गवाही के लिए अपने स्रोत की मंज़ूरी मिलने के बाद ही तैयार हुईं. गवाही में मिलर ने अपने स्रोत की पहचान ज़ाहिर नहीं की लेकिन उनके अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि वह स्रोत उपराष्ट्रपति डिक चेनी के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ लुइस "स्कूटर" लिब्बी थे. लेकिन लिब्बी ने 2003 में सीआईए के एजेंट वलेरी पाल्मे का नाम ज़ाहिर करने से इनकार किया है. अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की एक एजेंट - वलेरी पाल्मे का नाम ज़ाहिर होने के मामले की जाँच में सहयोग करने से मना करने पर जूडिथ मिलर को जेल भेज दिया गया था. अमरीका में सीआईए के एजेंट की पहचान ज़ाहिर करना एक संघीय अपराध हो सकता है. संवाददाताओं का कहना है कि इस तरह की अटकलें रही हैं कि बुश प्रशासन में एक अधिकारी ने वलेरी पाल्मे के पति को नीचा दिखाने के लिए जानबूझकर उस एजेंट की पहचान लीक की थी. वलेरी पाल्मे के पति जोसेफ़ विल्सन एक अमरीकी राजनयिक थे जिन्होंने इराक़ मुद्दे पर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की आलोचना की थी. विल्सन ने उन सबूतों के लिए बुश की आलोचना की थी जो उन्होंने इराक़ पर हमला करने के लिए सामने रखे थे. विल्सन ने बाद में आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी का नाम बदला लेने के इरादे से जानबूझकर लीक किया गया था. |
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