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अमरीकी पत्रकार जूडिथ मिलर रिहा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की एक पत्रकार जूडिथ मिलर को तीन महीने की जेल की सज़ा से रिहा कर दिया गया है. जूडिथ मिलर अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ काम करती हैं. अख़बार का कहना है जूडिथ मिलर ने अब अपने एक स्रोत से उस बातचीत के बारे में चर्चा करने के लिए इजाज़त हासिल कर ली है जो उसके साथ हुई होगी. अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की एक एजेंट - वलेरी पाल्मे का नाम ज़ाहिर होने के मामले की जाँच में सहयोग करने से मना करने पर जूडिथ मिलर को जेल भेज दिया गया था. अमरीका में सीआईए के एजेंट की पहचान ज़ाहिर करना एक संघीय अपराध हो सकता है. संवाददाताओं का कहना है कि इस तरह की अटकलें रही हैं कि बुश प्रशासन में एक अधिकारी ने वलेरी पाल्मे के पति को नीचा दिखाने के लिए जानबूझकर उस एजेंट की पहचान लीक की थी. वलेरी पाल्मे के पति जोसेफ़ विल्सन एक अमरीकी राजनयिक थे जिन्होंने इराक़ मुद्दे पर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की आलोचना की थी. विल्सन ने उन सबूतों के लिए बुश की आलोचना की थी जो उन्होंने इराक़ पर हमला करने के लिए सामने रखे थे. विल्सन ने बाद में आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी का नाम बदला लेने के इरादे से जानबूझकर लीक किया गया था. न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा था कि उसकी समझ के मुताबिक जूडिथ मिलर की रिपोर्ट का स्रोत उपराष्ट्रपति डिक चेनी के चीफ़ ऑफ़ स्टॉफ़ लेविस "स्कूटर" लिब्बी थे. अख़बार के अनुसार मिलर और लिब्बी जुलाई, 2003 में मिले थे और उन्होंने टेलीफ़ोन पर बातचीत भी की थी. सरकारी वकीलों ने जूडिथ मिलर और टाइम पत्रिकार के रिपोर्टर मैथ्यू कूपर दोनों को ही जेल भेजने की हिमायत की थी लेकिन जुलाई के आरंभ में कूपर ने अपना मन बदल दिया था और गवाही देने के लिए तैयार हो गए थे. जूडिथ मिलर के गवाही से इनकार करने पर उन्हें तीन महीने के लिए जेल भेज दिया गया था. मिलर ने जेल में 86 दिन काटे हैं. |
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