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अल्जीरिया में जनमत संग्रह ख़त्म | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़्रीकी देश अल्जीरिया में पिछले एक दशक से जारी संघर्ष की समाप्ति के लिए जनमत संग्रह पूरा हो गया है. गृहयुद्ध में एक लाख से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है. जनमत संग्रह में सरकार की बंदियों के क्षमादान की योजना के बारे में फ़ैसला होगा. इसका नतीजा शुक्रवार को आएगा. इन बंदियों में से अधिकतर गृहयुद्ध के दौरान हुई हत्याओं के आरोप में जेलों में क़ैद हैं. विपक्षी दलों ने जनमत संग्रह का ये कहते हुए विरोध करने की घोषणा की थी कि उचित न्याय के बिना सुलह नहीं हो सकती. अल्जीरिया के गृह मंत्रालय के अनुसार अभी भी वहाँ चरमपंथी सक्रिय हैं जिनकी संख्या 1000 तक हो सकती है. संघर्ष अल्जीरिया में 1992 में इस्लामिक चरमपंथियों और सरकारी सुरक्षाबलों के बीच हिंसा शुरू हो गई जब अधिकारियों ने चुनाव रद्द कर दिया. इस चुनाव में अल्जीरिया की प्रमुख इस्लामिक पार्टी इस्लामिक सैल्वेशन फ़्रंट जीतने जा रही थी. 1999 में भी अल्जीरिया में एक मिलता-जुलता जनमत संग्रह हुआ था जिसमें आंशिक क्षमादान पर मतदान करवाया गया. अल्जीरिया की राजधानी अल्जीयर्स में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर जनमत संग्रह में सरकार की योजना को मंज़ूरी मिल भी जाए तो भी देश की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रहेगी. संवाददाता के अनुसार अल्जीरिया, वहाँ के लोग और वहाँ की अर्थव्यवस्था बिल्कुल बदहाल है. |
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