|
अफ़ग़ान महिलाओं की पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक ऐसा देश जहाँ एक ज़माने में महिलाओं की कोई क़दर नहीं होती थी, उसी अफ़ग़ानिस्तान में अब महिलाओं के लिए पहली राष्ट्रीय पत्रिका निकाली जा रही है. 'मोर्साल' नाम की ये पत्रिका सभी महिलाओं के लिए बनाई गई है चाहे वो शहरी हो या फिर गाँव की महिलाएँ. पत्रिका में अफ़ग़ानिस्तान की ज़िंदगी के अनेक रूप को दर्शाया जाता है. फिलहाल पत्रिका को मुफ़्त बाँटा गया जिसका मक़सद आने वाले समय में पत्रिका के लिए मांग को बढ़ाना था. यह पत्रिका तीन भागों में बँटी हुई है. पहले हिस्से में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भूमिका के बारे में लिखा जाता है जबकि दूसरे हिस्से में महिला को एक माँ के रूप में और तीसरे में महिला को एक गृहणी के रूप में दर्शाया जाता है. यानी हर किसी के लिए कुछ ना कुछ ज़रूर है. चित्रमय अफ़ग़ानिस्तान में क़रीब 85 प्रतिशत महिलाएँ पढ़ना-लिखना नहीं जानतीं इसको ध्यान में रखते हुए पत्रिका में चित्रमय कहानियाँ भी है. इस योजना की प्रभारी शाहिर ज़हीन कहती है कि ये पत्रिका सबसे अलग है, "हम समझते है कि इस तरह की पत्रिका की ज़रूरत है जिसमें महिला से संबंधित हर मुद्दे के बारे में लिखा जाए. अभी तक हर पत्रिका पढ़ी लिखी महिलाओं के लिए छापी जाती थी." अफ़ग़ान संस्कृति में ज़्यादातर महिलाएँ पत्रिका ख़रीदने बाहर नहीं जातीं इसलिए घर बैठे 'मोर्साल' पत्रिका इन महिलाओं तक पहुँचाना होता है. पहले छह महीनों में 'मोर्साल' को एक स्थापित पत्रिका के साथ मुफ़्त दिया गया और कुछ महीनों बाद ही पत्रिका के लिए क़ीमत लगाई गई. संपादकों को आशा है कि यह पत्रिका अफ़ग़ानी महिलाओं के लिए अनेक जानकारी और मनोरंजन के साथ साथ शिक्षा का साधन भी साबित होगी. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||