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बुधवार, 10 अगस्त, 2005 को 20:16 GMT तक के समाचार
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जीवन के विकास में अदृश्य शक्ति का हाथ
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ईश्वरीय शक्तियों पर यक़ीन
वैज्ञानिक कहते हैं कि ये दुनिया और इंसान का अस्तित्व इवॉल्यूशन या विकासवादी प्रक्रिया का नतीजा है मगर अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश शायद इस स्थापना से सहमत नहीं हैं.

उन्होंने अमरीकी स्कूलों में एक ऐसा पाठ्यक्रम पढ़ाने की सलाह दी है जिसमें कहा गया है कि जीवन इतना जटिल है कि इसे बनाने में ज़रूर किसी ‘अदृश्य शक्ति’ का हाथ होगा.

राष्ट्रपति बुश का ये ‘इंटेलिजेंट डिज़ायन’ या दूसरे शब्दों में कहें तो ‘अदृश्य शक्ति’ का सिद्धांत एक बार फिर धार्मिक ताक़तों के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जाएगा.

बुश ने टेक्सस में पत्रकारों को बताया कि बच्चों को इस सिद्धांत के बारे में भी बताया जाना चाहिए, जिससे वे इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति को लेकर चल रही बहस को बेहतर ढंग से समझ सकें.

सतर्कता

वैसे ‘इंटेलिजेंट डिज़ायन’ का ये सिद्धांत बाइबिल के सिद्धांत से थोड़ा अलग है मगर रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर रिक सैंटोरम जैसे धार्मिक कट्टरपंथी खेमे के लोग भी इस बात को लेकर थोड़ा सतर्कता बरतते हैं कि इसे पढ़ाया कैसे जाए.

सैंटोरम कहते हैं, “विज्ञान की कक्षा में ये सिद्धांत पढ़ाया जाना मेरे विचार से ठीक नहीं होगा. मेरे विचार से ‘थ्योरी ऑफ़ इवॉल्यूशन’ या ‘उदविकास के सिद्धांत’ में भी कुछ वैध समस्याएँ हैं और इसे उस रूप में पढ़ाया जाना चाहिए.”

 इस सिद्धांत के ज़रिए विज्ञान में धार्मिक हिस्सा जोड़ने की कोशिश हो रही है. इसमें विज्ञान का कोई पहलू नहीं है और वैज्ञानिक रूप से तो ये जवाब देने लायक़ सवाल भी नहीं है.
एलन लेश्नर

वैसे इस बहस का असर दिख रहा है क्योंकि कंसास राज्य में शिक्षा बोर्ड उद्विकास के सिद्धांत को पढ़ाए जाने के तरीक़े पर विचार कर रहा है.

शायद ये इस बात का सूचक है कि कैसे, और ज़्यादा रूढ़िवादी राजनेता और अधिकारी इंटेलिजेंट डिज़ायन का ये सिद्धांत आगे बढ़ाना चाहते हैं.

वैसे कई वैज्ञानिक इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ये सिर्फ़ एक सिद्धांत भर है.

'स्तरहीन सवाल'

अमेरिकन एसोसिएशन फ़ॉर द एडवांसमेंट ऑफ़ साइंस के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर एलन लेश्नर कहते हैं, “ इस सिद्धांत के ज़रिए विज्ञान में धार्मिक हिस्सा जोड़ने की कोशिश हो रही है. इसमें विज्ञान का कोई पहलू नहीं है और वैज्ञानिक रूप से तो ये जवाब देने लायक़ सवाल भी नहीं है.”

अमरीका में 1920 के दशक में एक हाईस्कूल के अध्यापक जॉन स्कोप्स पर इसलिए मुक़दमा चलाया गया था क्योंकि वह मानव के विकास के बाइबिल के सिद्धांत के विरुद्ध ये पढ़ा रहे थे कि मानव का विकास विभिन्न जीव जंतुओं से जुड़ा है.

मगर उस मुक़दमे के बाद अमरीकी कक्षाओं में डार्विन का सिद्धांत प्रवेश पा गया था.

उसके लगभग 80 साल बाद अब लगता है कि इस इंटेलिजेंट डिज़ायन के सिद्धांत के ज़रिए धार्मिक कट्टरपंथियों को एक बार फिर उद्विकास के सिद्धांत पर सवालिया निशान लगाने का मौक़ा मिल गया है.

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