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कोइज़ुमी ने मध्यावधि चुनाव के लिए कहा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान के प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी ने संसद को भंग करते हुए 11 सितंबर को मध्यावधि चुनाव करवाने के लिए कहा है. जापान के सरकारी प्रसारक के मुताबिक़ इसके लिए उन्हें कैबिनेट की मंज़ूरी मिल गई है. इससे पहले प्रधानमंत्री कोइज़ुमी के देश की डाक सेवा में सुधार करने के प्रस्तावों को जापानी संसद के ऊपरी सदन ने अस्वीकार कर दिया था. इसके बाद ही प्रधानमंत्री ने संसद भंग करने और चुनाव कराने की बात कही थी. प्रस्ताव के पक्ष में 108 मत पड़े थे और विपक्ष में 125. मध्यावधि चुनाव करवाने के विरोध में एक मंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया है. अगर ये प्रस्ताव पारित हो जाता तो जापान की डाक सेवा को दुनिया के सबसे बड़े बैंक में बदला जा सकता था. डाक सेवा प्रस्ताव का विरोध करने वालों का मानना था कि इससे डाक सेवा की कार्यकुशलता पर असर पड़ेगा, ख़ासकर ग्रामीण इलाक़ो में. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ जुनिचिरो कोइज़ुमी डाक सेवा से जुड़े सुधारों को अपने नेतृत्व के साथ जोड़कर देख रहे थे. जापान की डाक सेवा काफ़ी बड़ी कंपनी है जिसमें क़रीब ढाई लाख लोग काम करते हैं जो डाक के अलावा भी कई सुविधाएँ देते हैं. राजनेता पारंपरिक तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में डाक सेवा का इस्तेमाल ग़ैर आधिकारिक रुप में मत बटोरने के लिए करते आएँ हैं. जापान में स्थानीय स्तर पर डाकिए का अपना एक अलग स्थान है और ये पुश्तैनी पेशा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता आया है. इसका निजीकरण करने से दुनिया के सबसे बड़े बैंक का गठन होता. |
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