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स्रोत बताओ वरना जेल जाओ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में एक अदालत ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक पत्रकार को एक सीआईए एजेंट का पर्दाफाश करने के एक मुक़दमे में गवाही देने से मुकरने पर जेल की सज़ा सुनाई है. पत्रकार जूडिथ मिलर ने 2003 में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के एक एजेंट का राज़ खोल दिया था और उस मुक़दमें में अपना स्रोत बताने से इनकार कर दिया. मिलर का तर्क है कि पत्रकारों को सूचनाएँ देने वाले अपने स्रोतों की गोपनीयता बनाए रखने का अधिकार होना चहिए ताकि प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके. टाइम पत्रिका के पत्रकार मेथ्यू कूपर ने भी गवाही देने से इनकार कर दिया. कूपर का कहना था कि उन्हें एक नाटकीय संदेश मिला जिसमें गवाही देने से मुक्त कर दिया गया है. अमरीकी क़ानून के मुताबिक सीआईए के किसी एजेंट का नाम खोलना एक संघीय अपराध हो सकता है. अभियोजक पैट्रिक फ़िट्ज़गेराल्ड यह जाँच कर रहे हैं कि बुश प्रशासन में वह कौन था या थी जिसने यह राज़ खोला कि वलेरी प्लेम एक सीआईए एजेंट थीं. पलेरी प्लेम एक पूर्व अमरीकी राजदूत की पत्नी हैं और उन्होंने राष्ट्रपति की आलोचना की थी. प्लेम के पति जोसेफ़ विल्सन ने भी पहले राष्ट्रपति बुश को उन सबूतों पर निशाना बनाया था जो उन्होंने इराक़ पर हमले को सही बताने के लिए पेश किए थे. विल्सन ने बाद में आरोप लगाया कि उनकी पत्नी का नाम जानबूझकर और बदले की कार्रवाई के तहत खोला गया. पैट्रिक फ़िट्ज़गेराल्ड ने पिछले सप्ताह तर्क दिया था कि मिलर और कूपर दों को ही अपने स्रोत नहीं बताने के आरोप में जेल भेज दिया जाए. इन्हीं दोनों ने प्लेम का नाम खुलने के मामले की रिपोर्टिंग की थी. गोपनीयता का अधिकार मिलर को बुधवार को सज़ा सुनाई गई कि जब तक इस मामले की जाँच पूरी नहीं हो जाती तब तक वह जेल में रहेंगी या फिर वह ख़ुद ही अपने स्रोत का नाम बताने के लिए तैयार हो जाएँ.
मामले की जाँच अक्तूबर 2005 तक चलने की संभावना है इस फ़ैसले के बाद मिलर ने कहा, "अगर पत्रकारों पर गोपनीयता बनाए रखने का भरोसा नहीं किया जा सकता तो वह अपना काम नहीं कर सकते और इसलिए स्वतंत्र प्रेस नहीं हो सकती." न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रकाशक का कहना है कि मिलर ने अपने स्रोत की गोपनीयता बनाए रखकर 'लोकतंत्र के हित में महान काम' किया है. संवाददाताओं का कहना है कि यह मामला सरकार और मीडिया के बीच दशकों से जारी जंग का एक बहुत ही गंभीर मामला है. अभियोजक पैट्रिक फ़िट्ज़गेराल्ड ने कहा कि पत्रकारों को जेल के बजाय घर में ही नज़रबंद करने जैसे उपायों से अदालत के प्राधिकार को चुनौती देने की बात उभर सकती है. उन्होंने कहा, "पत्रकार पूर्ण गोपनीयता बनाए रखने का वादा करने के योग्य नहीं हैं, अमरीका में कोई भी नहीं." प्लेम का नाम मिलर या कूपर को नहीं बताया गया था लेकिन उन्होंने चूँकि रिपोर्टिंग के दौरान इस मामले की जाँच पड़ताल की तो अभियोजक की नज़र में उनके नाम आ गए. इन पत्रकारों ने जाँच के दौरान जाँच में सहयोग करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वे अपने स्रोतों की जानकारी बताने के लिए बाध्य नहीं क्योंकि अमरीकी संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है. इन पत्रकारों की इस दलील को वाशिंगटन में एक अदालत ने ख़ारिज कर दिया था. इस मामले ने अमरीका में मीडिया की स्वतंत्रता के बारे में एक बार फिर बहस छेड़ दी है. |
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