|
मदद का अनोखा तरीका मगर... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस में एक युवक ने अपनी एक महिला मित्र को मॉस्को विश्वविद्यालय में दाख़िला दिलाने में मदद के के लिए कुछ अनोखा तरीका निकाला था लेकिन वह पकड़ा गया और सारी बात बिगड़ गई. हुआ दरअसल यूँ कि उस युवक ने अपनी महिला मित्र के स्थान पर ख़ुद परीक्षा में बैठने का इरादा किया और इसके लिए ज़ाहिर है उसे महिला का रंग-रूप भरना था. और उस युवक ने ऐसा किया तो, लेकिन वो कहावत है ना कि - नक़ल को भी अक़्ल चाहिए, वो साहब महिला का रूप इस तरह नहीं भर पाए कि कोई उन्हें पहचान नहीं पाता, हालाँकि उस युवक ने चेहरे पर भी काफ़ी मेकअप किया था. और जब यह युवक महिला का रूप भरे हुए परीक्षा देने के लिए मॉस्को विश्वविद्यालय पहुँचा तो वहाँ के सुरक्षा गार्ड को दाल में कुछ काला नज़र आया. उस गार्ड ने पहले तो सोचा कि हो सकता है 'इस महिला के वक्ष कुछ ज़रूरत से ज़्यादा ही बड़े हैं' लेकिन उसे यह बात कुछ जँची नहीं. उसने उस युवक की तलाशी लेनी शुरू की तो सारा भेद खुल गया. उसके बाद न सिर्फ़ उस युवक को बाहर निकाल दिया गया, बल्कि उस महिला का नाम भी अभ्यर्थियों की सूची से काट दिया गया जिसके स्थान पर वह ख़ुद परीक्षा देने आया था. मॉस्को विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष यासेन ज़सूरस्की ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया, "कोई युवक गणित की परीक्षा में एक महिला के रूप में शामिल होने की कोशिश कर रहा था." वह परीक्षा पत्रकारिता विभाग में ही हो रही थी. पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष का कहना था, "सुरक्षा गार्ड को शक हुआ कि कोई अभ्यर्थी कुछ सामान परीक्षा कक्ष में ले जाने की कोशिश कर रहा था, उसने तलाशी ली तो वह महिला के रूप में युवक निकला." संवाददाताओं का कहना है कि रूस के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में नक़ल एक बड़ी समस्या है और वहाँ रिश्वतखोरी भी बहुत है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||