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सामूहिक कब्र में सैकड़ों लाशें | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिणी इराक़ में उस सामूहिक कब्र की जाँच चल रही है जिसमें लगभग डेढ़ हज़ार लाशें मिली हैं जो अधिकतर बच्चों और महिलाओं की हैं. ये लाशें कुर्द लोगों की हैं जिन्हें एक क़तार में खड़ा करके गोली मार दी गई और 18 खंदकों में दफ़न कर दिया गया. ये सामूहिक कब्र दक्षिणी इराक़ के समावा शहर के पास मिली है और माना जा रहा है कि इन लोगों की हत्या 1980 के दशक में की गई थी. माना जा रहा है कि इन लोगों को उत्तरी इराक़ के कुर्द बहुल इलाक़ों से जबरन दक्षिणी इराक़ में लाकर मार डाला गया था. बग़दाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस सामूहिक कब्र को सद्दाम हुसैन और उनके वरिष्ठ सहयोगियों के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध अपराध के मामले में सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा. अब तक जितनी लाशें मिली हैं उनमें से पाँच को छोड़कर सभी औरतों और बच्चों की हैं. ये लोग कुर्द हैं इसकी पहचान उनके विशेष पहनावे से हुई है, उनके कपड़ों को देखने से लगता है कि उन्हें इस बात पता था कि उन्हें कहीं दूर ले जाया जा रहा है. इनमें से एक बूढ़ी महिला की भी लाश है जिसकी खोपड़ी में से नकली दाँत मिले हैं. एक कम उम्र की लड़की लाश भी खंदक से बाहर निकाली गई जिसने अपने हाथ में अपने सामान का थैला पकड़ा हुआ था. इराक़ी अधिकारियों का कहना है कि देश में लगभग 300 सामूहिक कब्रें हैं लेकिन अभी तक सिर्फ़ दो सामूहिक कब्रों की ही व्यवस्थित तरीक़े से जाँच हो पाई है. इस सामूहिक कब्र का पता पिछले वर्ष चला था लेकिन इसकी जाँच इस महीने के शुरू में आरंभ हुई है. सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ चलने वाले मुक़दमे की तारीख़ अभी तय नहीं हुई है लेकिन जब यह मुक़दमा शुरू होगा तो सामूहिक कब्रों को युद्ध अपराध के मुख्य सबूत के रूप में पेश किया जाएगा. इससे पहले इराक़ के हिल्ला में सामूहिक कब्र से बहुत बड़ी संख्या में लाशें मिली थीं जो पहले खाड़ी युद्ध के दौरान मारे गए शिया नौजवानों की थी. |
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