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धोखाधड़ी की थी पूर्व प्रमुख ने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दूरसंचार की विश्वस्तरीय अमरीकी कंपनी वर्ल्डकॉम के 2002 में दिवालिया होने के पीछे उसके प्रमुख कार्यकारी बर्नी एबर्स का हाथ था. वर्ल्डकॉम 2002 में बंद हो गई थी जिसके बाद जांच शुरु हुई जिसमें पाया गया कि एबर्स ने षडयंत्र किया था जिसके कारण पूरी कंपनी बर्बाद हो गई. 63 वर्षीय एबर्स को सात मामलों में जाली दस्तावेज़ दाखिल करने का भी दोषी पाया गया है. इस कंपनी के दिवालिया होने के कारण शेयरधारकों को 180 अरब डॉलर का विशुद्ध नुक़सान हुआ और 20 हज़ार से अधिक लोगों की नौकरी चली गई. अमरीका के इतिहास में वर्ल्डकॉम दिवालिया होने वाली सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है. एबर्स को 13 जून को सज़ा सुनाई जाएगी और उन्हें 85 साल तक की सज़ा हो सकती है. वर्ल्डकॉम पिछले साल दिवालियेपन से उबरी है और अब उसे एमसीएल के नाम से जाना जाता है. मैनहट्टन की एक अदालत ने इस मामले में फैसला किया है लेकिन फैसले को सुनाने में आठ दिन का समय लिया गया. छह हफ्तों तक इस मामले की सुनवाई हुई. एबर्स ने अदालत में कहा कि उन्हें कंपनी के खातों के बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही धोखाधड़ी के बारे मं. उन्होंने कंपनी के दिवालिएपन के लिए अपने पूर्व वित्त प्रमुख स्कॉट सुलीवान को ज़िम्मेदार ठहराया. सुलीवान ने इस मामले में बयान देते हुए कहा है कि उन्होंने जो किया अपने बॉस यानी एबर्स के कहने पर किया. यहां यह बात ध्यान देने योग्य है कि वर्ल्डकॉम पहले एक छोटी सी कंपनी हुआ करती थी जिसे एबर्स ने विश्व स्तरीय कंपनी में तब्दील कर दिया. अभियोजकों का कहना है कि वर्ल्डकॉम और एबर्स एक दूसरे के पर्याय हो गए थे. एबर्स ने कंपनी को खड़ा किया. उसे चलाया और उसे दिवालिया भी कर दिया. अपील इस मामले में सुलीवान समेत वर्ल्डकॉम के पांच अन्य अधिकारियों ने अपना दोष माना है और सज़ा का इंतज़ार कर रहे हैं. पूर्व में दूध बेचने, बासकेट ब़ाल की कोचिंग देने वाले और निजी सुरक्षाकर्मी का काम कर चुके एबर्स ने बहुत बाद में दूरसंचार क्षेत्र में कदम रखा. एबर्स ने हमेशा खुद को निर्दोष बताया है लेकिन जब फैसला सुनाया गया तो उनका चेहरा लाल था और उनका परिवार के सदस्य रो पड़े. |
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