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ज़ाव ज़ियांग का जीवन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपने जीवन के अंतिम 15 साल नज़रबंदी में बिताने वाले ज़ियांग को एक समय चीन के सबसे बड़े नेता के रुप में देखा जा रहा था. माना जा रहा था कि डेंग ज़ियाओ पिंग के बाद पार्टी की बागडोर सभांलने के लिए ज़ियांग सबसे उपयुक्त हैं. लेकिन तभी थिएन आन मन चौक पर प्रदर्शन शुरु हो गए. लोकतांत्रिक मूल्यों में रुचि रखने वाले ज़ियांग ने ऐसा काम किया जिसे कम्युनिस्ट पार्टी ने माफ नहीं किया. ज़ियांग चौक तक गए और प्रदर्शनकारी छात्रों से आंखों में आंसू भरकर अपील की कि वो चौक से हट जाएं. लेकिन छात्र डटे रहे. कुछ घंटों बाद ही बीजिंग में मार्सल लॉ लगा दिया गया और चौक पर सैनिक पहुंच गए. तब तक ज़ियांग को पार्टी नेता के पद से बर्खास्त किया जा चुका था. इसके बाद उन्हें फिर कभी सार्वजनिक रुप से देखा नहीं गया. देश के सबसे शक्तिशाली नेताओं मे से रहे ज़ियांग पर कम्युनिस्ट पार्टी में फूट डालने का गंभीर आरोप लगाया गया और बाकी की ज़िदगी उन्हें अपने घर में नज़रबंद होकर बितानी पड़ी. ज़ियांग का जन्म 1919 में हुआ था. 1980 में वह चीन के प्रधानमंत्री बने और सात साल बाद कम्युनिस्ट पार्टी के नेता. पार्टी नेता के रुप में उन्होंने आर्थिक सुधारों के क्षेत्र में कई साहसिक कदम उठाए लेकिन उन्हें इन कार्यों के लिए शायद ही कोई याद रखे. ज़ियांग की असफलताएं उनकी पहचान बन गईं. प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ बल प्रयोग के चीनी नेतृत्व के फैसले का नैतिक विरोध करने वाले ज़ियांग को अब शायद असफल लोकतांत्रिक सुधारों के प्रतीक के रुप में याद किया जाएगा. यह यादें चीन की वर्तमान सरकार के लिए डरावने सपनों की तरह होंगी जिसे डर है कि ज़ियांग की मौत के बाद देश में लोकतांत्रिक सुधारों की मांग में तेज़ी आएगी और प्रदर्शन होंगे. |
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