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इराक़ के बारे में और जानिए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सद्दाम हुसैन के छाया से मुक्त होने के बाद भी इराक़ की समस्याएं समाप्त नहीं हुई है. अंतरिम सरकार के लिए गंभीर समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं. सबसे बड़ी चुनौतियां हैं क़ानून व्यवस्था में सुधार , नयी राजनीतिक व्यवस्था कायम करना और पुनर्निर्माण. ज़मीन पर अमरीका के नेतृत्व वाली सेनाओं को गुरिल्ला छापामारों का सामना करना पड़ा रहा है. आए दिन देश भर में बम विस्फोट हो रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को निशाना बनाया जा रहा है. अप्रैल 2003 में अमरीकी सेना ने तीन हफ्ते की लड़ाई के बाद सद्दाम हुसैन की सरकार को अपदस्थ कर दिया था. कारण था इराक़ के पास कथित तौर पर जनसंहार के हथियार होना. इन हथियारों का कोई पता अभी तक नहीं चला है. अगले साल अमरीकी सेना ने अंतरिम इराक़ी सरकार को सत्ता सौंप तो दी लेकिन कई समस्याओं के साथ. सद्दाम के शासनकाल में इराक़ को दो युद्दों का सामना करना पड़ा था. ईरान के साथ और कुवैत युद्ध.
इराक़ के बारे में दज़ला और फ़रात नदियों के पास बसा इराक़ चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है. प्राचीन काल में यही इलाक़ा मैसोपोटामिया कहा जाता था. मानव सभ्यता के विकास का एक महत्वपूर्ण स्थान. मध्य युग में इराक़ इस्लामी साम्राज्य का केंद्र रहा. भारतीय उपमहाद्वीप से लेकर मोरक्को तक फैले इस साम्राज्य की राजनीतिक और सांस्कृतिक राजधानी हुआ करती थी बगदाद. 13 वीं सदी में मंगोल आक्रमण हुआ और धीरे धीरे साम्राज्य छिन्न भिन्न होने लगा. 1932 में इस क्षेत्र को ब्रिटेन के चंगुल से आज़ादी मिली. 1958 में तत्कालीन ख़लीफा का शासन में विद्रोह हुआ और अरब राष्ट्रवाद का उदय भी. 1968 के तख्तापलट में बाथ ( पुनर्जागरण ) पार्टी ने सरकार बनाई. सद्दाम इसी पार्टी के सदस्य रहे सद्दाम 1979 में देश के राष्ट्रपति बने. तेल ने इराक़ को धनी बनाया लेकिन 1980 में ईरान के साथ युद्ध शुरु हुआ. आठ साल चले युद्घ के बाद 1991 में कुवैत पर किया गया हमला इराक को मंहगा पड़ा. 1991 में दुनिया भर के देशों की सामूहिक कार्रवाई के संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि इराक़ की स्थिति वैसी है जैसी दुनिया के और देशों की औद्योगिक क्रांति से पहले थी. आगे चलकर देश के कुर्द समुदाय ने अपना अलग प्रांत बना लिया जिसे आधी अधूरी आज़ादी मिली हुई है. तथ्य जनसंख्या - करीब सवा दो करोड़. नेता अंतरिम राष्ट्रपति - ग़ाज़ी अल यावर पेशे से व्यवसायी ग़ाज़ी अल यावर सुन्नी हैं और कबीलाई नेता भी. उन्हें अमरीका द्वारा नियुक्त शासकीय परिषद ने राष्ट्रपति पद के लिए चुना. सद्दाम के सत्ता से बेदखल होने के बाद यावर इराक़ आए और इससे पहले वह सऊदी अरब में दूरसंचार का कारोबार करते थे. अंतरिम प्रधानमंत्री - इयाद अलावी
पेशे से व्यवसायी अलावी एक धर्मनिरपेक्ष शिया हैं और पूर्व में बाथ पार्टी के सदस्य भी रह चुके हैं. 1970 में सद्दाम का विरोध करने के बाद उन्हें इराक़ छोड़ना पड़ा. लंदन में निर्वासित जीवन बिताते हुए इराक़ी राष्ट्रीय सहमति का गठन किया और अमरीका एवं ब्रिटिश गुप्तचर संस्थाओं की मदद की. विदेश मंत्री- होशयार ज़ेबारी, रक्षा मंत्री - हाज़िम शालान, वित्त मंत्र- अदिल अब्दल मेंहदी मीडिया
सद्दाम के अपदस्थ होने के बाद कई सारे मीडिया संस्थान खुले. हालांकि अरब दुनिया से तुलना करें तो इराक़ की मीडिया का वातावरण पहले भी बेहतर था. बगदाद और अन्य शहरों में 100 से अधिक अख़बार और पत्रिकाएं हैं. निजी रेडियो और टेलीविजन चैनल भी देखे और सुने जा सकते हैं. विदेशी चैनलों ने भी इराक़ पर नज़रें गड़ाई हैं. बीबीसी, रेडियो मोंटे कार्लो, और अमरीका समर्थित सावा एवं रेडियो फ्री इराक़. इनमें से कई तो एफएम पर सुने जा सकते हैं. |
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