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अपहरणों का सिलसिला भी चलता रहा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में पूरे साल भर न केवल बम विस्फोटों में ही लोगों की जानें गई बल्कि कई देशों के नागरिकों का अपहरण भी हुआ. विभिन्न चरमपंथी संगठनों ने अलग अलग देशों के नागरिकों का अपहरण किया. कुछ बंधक किस्मतवाले थे जो छूट गए लेकिन कई बंधकों को मौत के घाट उतार दिया गया. अप्रैल में अमरीकी सेना के अनुसार इराक़ में 12 देशों के 40 से अधिक नागरिक इराक़ में बंधक थे. चीन, पोलैंड, नेपाल, फ्रांस, ब्रिटेन, अमरीका, जापान, कीनिया, रुस, मिश्र और फिलीपींस के नागरिकों को बंधक बनाया गया. सबसे अधिक चर्चा में रहे ब्रिटिश मूल के बंधक मारग्रेट हसन, ब्रिटिश नागरिक केनेथ बिगले जिन्हें मौत के घाट उतार दिया गया. लेकिन किस्मतवाले थे भारत के तीन बंधक और दो फ्रांसीसी पत्रकार जिन्हें चरमपंथियों ने छोड़ दिया. भारतीय बंधक जुलाई के महीने में कुवैत की एक कंपनी के लिए काम करने वाले तीन भारतीय लोगों को बंधक बनाया गया. उनके साथ कीनिया के दो और एक मिश्र के एक नागरिक को भी बंधक बना लिया गया. फिर शुरु हुआ बातचीत का दौर. संगठन ने अपनी मांगे स्पष्ट नहीं की. आम तौर पर ये संगठन उन देशों के नागरिकों को बंधक बनाते थे जो अपने सैनिक इराक़ में भेज चुके थे. लेकिन भारत के साथ ऐसा मामला नहीं था. संगठन का कहना था कि ये सभी लोग कुवैत की एक कंपनी के लिए काम करते हैं जो इराक़ में अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ सहयोग कर रही है. संगठन ने उस कुवैती कंपनी से अपने सभी कर्मचारी इराक़ से वापस हटाने को कहा है. इस समाचार एजेंसी एपी ने ख़बर दी कि जिन तीन भारतीयों को बंधक बनाया गया है उनके नाम हैं - अंतर्यामी, तिलकराज और सुखदेव सिंह. कई दिनों की बातचीत के बाद भारतीय बंधकों को रिहा कर दिया गया. लेकिन नेपाल के 12 बंधकों का नसीब इतना अच्छा नहीं था. इन सभी बंधकों को मार डाला गया. पश्चिमी नागरिक पश्चिमी देशों के नागरिक इतने खुशकिस्मत नहीं थे. ब्रिटिश मूल की मारग्रेट हसन को बंधक बनाया गया तो कई इराक़ी नेताओं ने भी उन्हें छोड़ने की अपील की. चूंकि मारग्रेट पिछले कई सालों से इराक़ में केयर नामक संस्था के लिए काम कर रही थीं और इराक़ी जनता में काफी लोकप्रिय भी.
लेकिन अपहर्ताओं ने मारग्रेट को नहीं छोड़ा. ऐसा ही कुछ हुआ केनेथ बिगले के साथ. बिगले को दो अमरीकी नागरिकों के साथ बंधक बनाया गया. दोनों अमरीकी नागरिकों को तो पहले ही मार डाला गया लेकिन बिगले की तस्वीर बार बार टीवी पर दिखाई जाती रही. बिगले की अपील काम नहीं आई और उन्हें भी मार डाला गया. हालांकि पोलैंड की बंधक तेरेस्का बोर्कज, इटली की बंधक सिमोना पारी और सिमोना टारेटा और दो फ्रांसीसी पत्रकारों को रिहा कर दिया गया. इन सभी अपहरणों की ज़िम्मेदारी अलग अलग संगठनों ने ली. कभी ज़रकावी से जुड़े समूह ने तो कभी लायंस ऑफ ब्रिगेड तो कभी इस्लामिक आर्मी और अंसार उल सुन्ना ने. |
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