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बेसलान ने हिला दिया पूरी दुनिया को | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रुस में यूं तो साल भर बहुत कुछ होता रहा लेकिन सितंबर महीने में बेसलानस्कूल के हादसे ने तो जैसे पूरी दुनिया को सकते में ला दिया. रुस के ओसेतिया प्रांत के बेसलान शहर के एक स्कूल में नकाबपोश हमलावरों ने धावा बोला और स्कूल में मौजूद सैकड़ों छात्रों और शिक्षकों को बंधक बना लिया. 30 हमलावरों के कब्ज़े में क़रीब 1000 लोग थे. बंधक बनाने की ज़िम्मेदारी ली थी चेचन विद्रोही नेता शमिल बसायेव ने. इस ज़िम्मेदारी ने एक बार फिर रुस की वर्षों पुरानी चेचन्या समस्या की भयावहता दुनिया के सामने ला दी. दो दिन बाद जब रुसी सैनिकों ने स्कूल पर धावा बोलकर बच्चों को मुक्त कराया तो इस मुसीबत का खूनी अंत हुआ. आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार 330 से अधिक लोग मारे गए जिसमें अधिकतर बच्चे थे.
हमलावरों में से सिर्फ एक को गिरफ्तार किया जा सका. पूरी दुनिया ने इस हमले की कड़ी निंदा की और रुस से चेचन समस्या का शांतिपूर्ण समाधान करने को कहा. बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के जवाब में राष्ट्रपति पुतिन ने कड़ा बयान दिया. यहीं बात ख़त्म नहीं हुई और पुतिन ने सुरक्षा संबंधी विधेयक भी पेश किया. विधेयक के अनुसार देश में क्षेत्रीय गवर्नरों की नियुक्ति का काम राष्ट्रपति ने अपने हाथों में ले लिया. जानकारों के अनुसार पुतिन ने बेसलान के बाद रुस में अपने नियंत्रण को और मज़बूत करने का प्रयास किया. चेचन समस्या को निपटाने के लिए कोई पहल नहीं की गई और पुतिन अब भी बात करने के पक्ष में नहीं दिखते. दूसरी तरफ चेचन विद्रोही लगातार और हमलों की धमकी दे रहे हैं. दुनिया में और भी कई स्थानों पर चरमपंथी हमले होते रहे हैं लेकिन पहली बार बच्चों को निशाना बनाया गया है. शायद इसीलिए इस घटना की क्रूर छवि लोगों के ज़ेहन में लंबे समय तक बनी रहेगी. |
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