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अमरीकी रक्षा प्रणाली का टेस्ट असफल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में मिसाइल रक्षा प्रणाली का एक ताज़ा परीक्षण असफल हो गया है. इस रक्षा प्रणाली का मकसद अमरीका को अन्य देशों के हमले से बचाना है. परीक्षण में अलास्का में एक स्थल से छोड़ी गई मिसाइल को मार गिराने के लिए प्रशान्त महासागर के एक केंद्र से मिसाइल दाग़ी जानी थी लेकिन मिसाइल दाग़ी ही नहीं जा सकी. दो वर्षों में पहली बार किए गए इस परीक्षण की विफलता रक्षा मंत्रालय पेंटागन के लिए भारी झटका है. ये रक्षा प्रणाली अरबों डॉलर के ख़र्चे पर तैयार की जा रही है और पेंटागन इस पर हर साल दस अरब डॉलर ख़र्च करता है. ये इस साल के अंत तक तैयार होनी थी. पेंटागन का कहना है कि उसे फ़िलहाल नहीं पता कि ऐसा क्यों हुआ और इसके कारणों की जाँच की जा रही है. बुश प्रशासन की कोशिश थी कि इस वर्ष के अंत तक मिसाइल रक्षा प्रणाली की शुरूआती संचालन क्षमता की घोषणा की जाए. अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने इस मिसाइल रक्षा प्रणाली को तैयार करने में अपनी राजनैतिक और आर्थिक ताक़त झोंक दी है. ये प्रणाली 1983 में राष्ट्रपति रौनल्ड रीगन की विवादास्पद मिसाइल विरोधी प्रणाली से कुछ छोटी है. उस प्रणाली को स्टारवॉर्स के नाम से भी जाना जाता है. राष्ट्रपति बुश की ये प्रणाली उत्तर कोरीया जैसे देशों से छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइलों से बचने के लिए एक सीमित बचाव ही प्रदान कर सकती है. अमरीकी प्रशासन का कहना है कि ये प्रणाली अमरीका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए बहुत अहम है. हालांकि आलोचकों का कहना है कि ये सिर्फ़ पैसे का फ़ज़ूलख़र्ची है और ये योजना काम नहीं करेगी. |
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