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'चीन पर लगा प्रतिबंध नहीं हटेगा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ ने कहा है कि वह 15 साल पहले चीन पर लगाए गए हथियारों की ख़रीद और बिक्री संबंधी प्रतिबंध को हटाने के लिए तैयार नहीं है. ये प्रतिबंध 1989 में थियानमन स्क्वेयर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर उसकी कार्रवाई के बाद लगाया गया था लेकिन चीन अब चाहता है कि इसे हटाया जाए. लेकिन यूरोपीय संघ और चीन के संयुक्त बयान में कहा गया है बीजिंग यूरोप के इस वादे का स्वागत करता है कि प्रतिबंध हटाने की दिशा में काम किया जाएगा. उधर अमरीका ने धमकी दी है कि यदि यूरोप प्रतिबंध हटाता है तो वह यूरोप के साथ रक्षा मामलों के संबंध में सहयोग को सीमित कर देगा.
फ़्रांस और जर्मनी चाहते हैं कि प्रतिबंध हटा लिया जाए लेकिन कुछ अन्य यूरोपीय संघ देश इस बारे में काफ़ी सतर्कता बरत रहे हैं. वेन जियाबाओ हेग में यह विवाद उस समय उठा है जब चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ सम्मेलन में भाग लेने कि लिए हेग पहुँचे हैं. नीदरलैंड्स के विदेश मंत्री बर्नार्ड बॉट ने कह दिया है कि फ़िलहाल ये प्रतिबंध हटाया नहीं जाएगा. लेकिन चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ का कहना है कि प्रतिबंध शीत युद्ध के समय लगाया गया था और ये यूरोपीय संघ और चीन की वर्तमान भागीदारी और वास्तविकता को नहीं दर्शाता. यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख हाविए सोलाना की प्रवक्ता क्रिस्टीना गैलैच मानती हैं कि इस मुद्दे को लेकर यूरोपीय संघ में मतभेद हैं उनका कहना है, "ये बात साफ़ है कि कुछ देश प्रतिबंध हटाना चाहते हैं. लेकिन कुछ देशों को मानवाधिकार से जुड़े मामलों की चिंता है. साथ ही चिंता प्रशांत महासागर के इलाक़े की स्थिरता को लेकर भी है." बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस कहते हैं कि दरअसल, यूरोपीय संघ पर अमरीका का काफ़ी दबाव है कि हथियारों की ख़रीद फ़रोख़्त का ये प्रतिबंध न उठाया जाए. अमरीका की चिंता ताइवान और प्रशांत महासागर के इलाक़े में सामरिक और कूटनीतिक स्थिति को लेकर है. क्रिस्टीना गैलैच अमरीकी दबाव को स्वीकार करते हुए कहती हैं, "हाँ, हमें इस बात का एहसास है कि अमरीका दबाव बना रहा है. लेकिन यूरोपीय संघ के देश इस मुद्दे पर बहस करने के बाद सहमति बनाकर अपना फ़ैसला ख़ुद लेंगे." |
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