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वेनेज़ुएला मे राष्ट्रपति शावेज़ को राहत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वेनेज़ुएला में चुनाव अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ के नेतृत्व के बारे में हुए जनमत संग्रह में राष्ट्रपति को निर्णायक बढ़त मिल गई है. मगर विपक्षी दलों ने जनमत संग्रह के नतीजे को ये कहते हुए अस्वीकार कर दिया है कि इसमें धाँधली की गई है. विपक्ष ने कहा है कि वह इस कथित धाँधली के प्रमाण अमरीका की दो संस्थाओं से आए पर्यवेक्षकों के सामने पेश करेगा. लेकिन राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ ने अपने विरोधियों से कहा है कि कि वे जनमत संग्रह के नतीजे को स्वीकार करें जिसमें उनके नेतृत्व के प्रति आस्था प्रकट की गई है. वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि विपक्ष के सकते में होने के बावजूद अगर पर्यवेक्षकों ने नतीजों को हरी झंडी दे दी तो विपक्ष के लिए शोर-शराबा करने में मुश्किल आएगी. मुश्किल उल्लेखनीय है कि ह्यूगो शावेज़ 1990 के दशक के अंत में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति बने और तब से लेकर उन्हें सत्ता से हटाने की कई कोशिशें हो चुकी हैं. उनके ख़िलाफ़ सैनिक विद्रोह भी हुआ और उनके शासन में एक लंबी हड़ताल भी हुई मगर शावेज़ की कुर्सी सलामत रही. इसके बाद विदेशी पर्यवेक्षकों ने ये सुझाव दिया कि वेनेज़ुएला के संकट को सुलझाने का सबसे बढ़िया उपाय ये है कि वहाँ जनमत संग्रह करवा लिया जाए जिसका कि संविधान में प्रावधान है. राष्ट्रपति भी इसके लिए तैयार हो गए थे और अब जनमत संग्रह के नतीजे मिलने के बाद वे बाक़ी लोगों से साथ देने की माँग कर रहे हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि वेनेज़ुएला का मध्य वर्ग शावेज़ से घृणा करता है और मानता है कि उन्होंने वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया. लेकिन संवाददाता के अनुसार अब ये देखना है कि उनके विरोधी किस हद तक शावेज़ को हटाने के बारे में उम्मीद लगा पाते हैं जिनका कार्यकाल 2006 तक तय है. |
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