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चोरी के गुर सिखाने का शिविर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कहावत है - करत-करत अभ्यास तें, जड़मति होत सुजान, यानी किसी भी काम या हुनर को सीखने के लिए लगातार अभ्यास करने से कुशलता हासिल हो जाती है, चाहे फिर वह चोरी ही क्यों ना हो. है तो ज़रा चौंकने की बात, लेकिन रुस में ऐसी ही कुछ हुआ कि चोरी के गुर सिखाने के लिए बाक़ायदा एक शिविर लगाया गया, यह और बात है कि वह पुलिस की नज़र में आ गया. रूस के सखालिन द्वीप पर पुलिस ने एक ऐसे शिविर पर छापा मारा है जहाँ युवाओं को चोरी और छीना-झपटी के गुर सिखाए जा रहे थे. रूस में गर्मियों की छुट्टी में लगाए जाने वाले शिविरों में माता-पिता अपने बच्चों को भेज दिया करते हैं जहाँ वे मौज-मस्ती करने के अलावा कुछ काम की बातें भी सीख सकें. मगर सखालिन में पुलिस ने जिस शिविर को पकड़ा है वहाँ कुछ और ही चल रहा था. एक अज्ञात टेलीफ़ोन कॉल पर मिली जानकारी के बाद पुलिस इस शिविर को देखने पहुँची और वहाँ का नज़ारा देखकर उनकी आँखें फटी रह गईं. उन्होंने देखा कि दो क़द्दावर लोग लगभग 30 किशोरों को ये सिखा रहे थे कि चोरी कैसे की जाए, कैसे छीना-झपटी की जाए और अगर पुलिस धर ले तो क्या किया जाए. शिविर में व्यवस्था भी आला दर्जे की थी जहाँ शिविर के अलावा खाने, सोने और बिजली-पानी की बाक़ायदा व्यवस्था की गई थी. अब रूसी पुलिस ये पता कर रही है कि किशोरों को चोरी की कला में पारंगत करने वाला ये शिविर अपनी तरह का अकेला शिविर था या ऐसे और भी शिविर चलाए जा रहे हैं. पुलिस को इस बात पर भी अचरज हुआ कि शिविर के लिए बच्चों से किसी तरह की कोई फ़ीस नहीं ली जा रही थी. वैसे यदि फ़ीस ली जाती तो शायद बच्चों की तत्काल परीक्षा भी हो जाती जो शिविर में सीखी गई अपनी कला का प्रयोग कर गुरु दक्षिणा भी अदा कर देते. |
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