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अमरीका में दो बार फ़र्नांडिस की तलाशी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नाडिस की दो बार अमरीका यात्रा के दौरान जामातलाशी ली गई. दोनों बार तलाशी डलास एयरपोर्ट पर हुई. एक बार तो वे बाक़ायदा रक्षामंत्री के रुप में अमरीका की सरकारी यात्रा पर थे और दूसरी बार वे ब्राज़ील जा रहे थे. यह जानकारी अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री स्ट्रोब टालबोट ने अपनी किताब में दी है. अपनी किताब 'एंगेजिंग इंडिया-डिप्लोमेसी, डेमोक्रेसी एंड द बॉम्ब' में उन्होंने लिखा है कि जॉर्ज फ़र्नांडिस ने इस बात का ज़िक्र ख़ुद ही उनसे किया था जब वे इस साल फ़रवरी में भारत गए थे. उन्होंने लिखा है कि एक बैठक के दौरान यशवंत सिन्हा, जॉर्ज फ़र्नांडिस और ब्रजेश मिश्रा इस बात पर असहज लग रहे थे कि अमरीका पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को सुविधाएँ दे रहा है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार ख़ुद जॉर्ज फ़र्नांडिस ने उन्हें बताया कि डलास विमानतल पर अमरीकी अप्रवासन अधिकारियों ने उनकी जामातलाशी ली. पहली बार 2002 में जब वे अमरीका की सरकारी यात्रा पर थे और दूसरी बार 2003 के मध्य में जब वे ब्राज़ील जाते वक़्त वहाँ से गुज़रे थे. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के बारे में लिखा है कि परमाणु हथियारों और भारत की सुरक्षा के मामले में उनकी राय बिलकुल इंदिरा गाँधी की तरह है. नवाज़ शरीफ़ अमरीका से पत्रकार सलीम रिज़वी ने बताया कि टालबोट ने अपनी किताब में लिखा है कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को सऊदी अरब अमरीका ने भिजवाया था. उनका कहना है कि किताब में टालबोट ने लिखा है कि तख़्तापलट के बाद जिस तरह से नवाज़ शरीफ़ जेल में बंद थे उससे अमरीकी प्रशासन परेशान था कि एक बार फ़िर ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो वाला क़िस्सा न दोहराया जाए. टालबोट ने लिखा है कि इसके बाद अमरीका ने बहुत कोशिशें कीं और नवाज़ शरीफ़ को सऊदी अरब भेजने का इंतज़ाम करवाया. |
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