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सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को झटका लगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में स्थानीय चुनावों में सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को भारी झटका लगा है. इंग्लैंड और वेल्श में हुए इन चुनावों में पार्टी तीसरे नंबर पर रही है. लेबर पार्टी को कुल 464 सीटों का नुक़सान हुआ है और उसके हाथ से आठ नगर काउंसिल निकल गए हैं. इनमें न्यूकैसल और लीड्स जैसी महत्वपूर्ण काउंसिल शामिल हैं. पार्टी के लिए राहत की एकमात्र बात यह रही कि लंदन के मेयर पद पर उसके उम्मीदवार केन लिविंग्सटन दोबारा चुने गए हैं. लेबर नेता और ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने स्वीकार किया है कि उनकी इराक़ नीति की छाया चुनावों पर पड़ी है. हालाँकि उन्होंने आत्मविश्वास व्यक्त किया है कि अगले आम चुनाव में लेबर पार्टी एक बार फिर जीतेगी. उन्होंने अपनी सरकार की सुधारवादी नीतियों को भी जारी रखने की बात की. बहस बीबीसी के राजनीतिक संवाददाता एंड्रूय मार के अनुसार पार्टी में ब्लेयर के विरोधी इन चुनाव परिणामों का इस्तेमाल इस बहस को हवा देने में करेंगे कि अपनी आक्रामक इराक़ नीति के कारण प्रधानमंत्री आम चुनावों में पार्टी के लिए बोझ साबित हो सकते हैं. इन चुनावों में डाले गए वोटों के आधार पर बीबीसी ने अनुमान लगाया है कि देश भर के स्तर पर कंज़र्वेटिव पार्टी 38 प्रतिशत वोटो के साथ सबसे आगे हैं. लिबरल डेमोक्रेट का वोट 29 प्रतिशत है, जबकि लेबर का मात्र 26 प्रतिशत. लिबरल डेमोक्रेट नेता चार्ल्स केनेडी ने कहा कि चुनाव परिणामों ने साबित कर दिया है कि ब्रिटेन में तीन-दलीय राजनीतिक व्यवस्था स्थापित हो चुकी है. |
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