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अमरीका में आयुर्वेद का चलन बढ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका मे योग के बाद अब आयुर्वेद का भी चलन बढ़ रहा है और योग के साथ-साथ अब आयुर्वेद सिखाने के लिए कई विद्यालय खुल गए हैं. कैलीफ़ोर्निया, न्यूयॉर्क, कैनेटीकट और मैसाचुसेट्स जैसी जगहों पर अब आयुर्वेद को बाक़ायदा एक कोर्स की तरह पढ़ाया जा रहा है और इसके लिए अलग कॉलेज खुल गए हैं. अमरीकी लोगों में आयुर्वेदिक रसायन, दवाओं और जड़ी-बूटियों के प्रति अब ज़्यादा रूझान देखने में आ रहा है. अमरीका में रहनेवाले भारतीय मूल के लोग आयुर्वेद सिखाने में लगे हैं. साथ-साथ बहुत से अमरीकी भी भारत से आयुर्वेद का ज्ञान हासिल करके अमरीका में लोगों को सिखा रहे हैं. सम्मेलन इसी सिलसिले में कैनेटीकट में पहले अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेदिक सम्मेलन का भी आयोजन हुआ. इस सम्मेलन में एलोपैथी डॉक्टर और सर्जन जुटे और विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे. इनमें सबसे अहम था कि अमरीका में लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए आयुर्वेद का कैसे इस्तेमाल किया जाए. अब अमरीका में आयुर्वेद को एलोपैथी यानी पश्चिमी चिकित्सा पद्यति के साथ मिलाकर बीमारी के इलाज की भी कोशिश हो रही है. मूल रूप से भारत के इलाहाबाद से संबंध रखने वाली डॉक्टर अमला गुहा कैनेटीकट विश्वविद्यालय में आयुर्वेद की प्रोफ़ेसर हैं.
सम्मेलन के बारे में वे कहती हैं, "आयुर्वेद की चीज़ों को एकत्र कर उसे लोगों के सामने रखा जाए तो इसे मुख्यधारा की दवाओं में लाने में बहुत मदद मिलेगी". उन्होंने कहा, "अमरीका में भी लोग अब समझने लगें हैं कि आयुर्वेद एक चिकित्सा विज्ञान है." अमरीका के डॉक्टर रॉबर्ट स्वोबोदा ने हवन और श्लोक से सम्मेलन का आरंभ किया जिन्होंने पुणे से आयुर्वेद की डिग्री हासिल की है. उनके साथ भारतीय मूल के डॉक्टर वसंत लाड भी अमरीका के न्यूमेक्सिको राज्य के अलबकर्क शहर में एक आयुर्वेदिक संस्थान चलाते हैं. प्रयास सम्मेलन में आईं अमरीकी महिला निशांतो केन ने बताया, "मुझे लगता है कि हमें अमरीका में एक ऐसी चिकित्सा प्रणाली चाहिए जो बीमारों के बारे में सोचे ना कि पैसा बनाने का तरीक़ा हो. अमरीका की चिकित्सा व्यवस्था हमारी ज़रूरतें पूरी नहीं कर सकती." लोगों में आयुर्वेद को समझने की रूचि को देखते हुए कई लोगों ने तो अच्छी नौकरियों को छोड़ कर आयुर्वेद और योग सिखाने का काम शुरू कर दिया है. भारतीय मूल की रेणुका एमबीए करने के बाद 15 साल तक अमरीका में बड़ी-बड़ी कंपनियों में मैनेजर की नौकरी कर चुकी हैं लेकिन अब वे कनैटीकट में योग और आयुर्वेद सिखाती हैं. रेणुका कहती हैं, "मैंने अपनी कॉरपोरेट जगत की नौकरी छोड़ कर सही फ़ैसला किया और मैं काफ़ी खुश रहती हूँ." लेकिन अमरीका में आयुर्वेद के चलन की राह आसान नहीं रही. डॉक्टर अमला गुहा कहती हैं, "अब भी आयुर्वेद के बारे लोगों को अधिक जानकारी नहीं है. लोग योग करते हैं मगर ये नहीं जानते कि वो आयुर्वेद का ही हिस्सा है." उनके संस्थान में अब ये सिखाया जा रहा है कि आयुर्वेद के सूत्रों को विदेशी संस्कृति में कैसे लागू किया जाए और कैसे आम लोगों तक पहुँचाया जाए. इस साल अक्तूबर में कैलीफ़ोर्निया में एक और आयुर्वेदिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. |
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