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बेवफ़ाई का जीन? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बेवफ़ाई संभवत: शरीर में पाए जाने वाले विशेष जीनों का नतीजा होती है. यह दावा लंदन के सेंट थॉमस अस्पताल के ट्विन रिसर्च यूनिट को प्रोफ़ेसर टिम स्पेक्टर ने किया है. उन्होंने महिलाओं पर अध्ययन किया. प्रोफ़ेसर स्पेक्टर के अनुसार यदि जुड़वाँ बहनों में से एक अपने पार्टनर के साथ बेवफ़ाई करती हो तो इस बात की 55 फ़ीसदी संभावना है कि दूसरी भी ऐसा ही करेगी. ऐसा माना जाता है कि 100 में से 23 महिलाएँ अपने पार्टनर के साथ पूरी तरह वफ़ादार नहीं होती. प्रोफ़ेसर स्पेक्टर ने यह भी पाया कि जुड़वाँ में से दोनों लड़कियाँ या दोनों लड़के हों तो उनके वफ़ादार या बेवफ़ा होने की बराबर की संभावना होती है. यानी कुछ ख़ास जीनों पर यह सब निर्भर करता है. प्रोफ़ेसर स्पेक्टर ने कहा कि किसी एक जीन को वफ़ादारी या बेवफ़ाई से नहीं जोड़ा जा सकता. उन्होंने कहा, "ऐसी कम ही संभावना है कि इस तरह का कोई एक जीन होता होगा. लेकिन ऐसी संभावना है कि जीनों का एक समूह ऐसी चारित्रिक विशेषताओं के लिए ज़िम्मेदार होता होगा. जैसे जोखिम उठाने के लिए तैयार रहने वालों के जीन या किसी ख़ास व्यक्तित्व वाले के जीन." हालाँकि जीन का सिद्धांत देने के साथ-साथ उन्होंने यह भी कहा कि बेवफ़ाई जीनों के अलावा कई सामाजिक कारकों पर भी निर्भर करती है. सामाजिक मनोवैज्ञानिक डॉ. पेट्रा बॉयन्टन भी सामाजिक कारकों के सिद्धांत से सहमत हैं. बॉयन्टन ने कहा, "यदि एक बच्चे के रूप में आपको देखने को मिले कि कैसे आपकी माँ आपके पिताजी को धोखा दे रही है, तो उस आचरण की नकल करना आपके लिए आसान होगा." |
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