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अबू बकर फिर गिरफ़्तार हुए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशिया में मुस्लिम धार्मिक नेता अबू बकर बशीर को शुक्रवार को जेल से रिहा होते ही फिर गिरफ़्तार कर लिया गया. उन्हें आव्रजन संबंधी एक मामले में 18 महीने की सज़ा हुई थी मगर बशीर ने आरोप को ग़लत बताया था. पश्चिमी देशों की सरकारों ने बशीर पर ये भी आरोप लगाए हैं कि वे चरमपंथी संगठन जेमा इस्लामिया के आध्यात्मिक नेता हैं. मगर बशीर इससे भी इनकार करते हैं. रिहाई और गिरफ़्तारी
शुक्रवार को बशीर को एक बख़्तरबंद गाड़ी में बिठाकर थाने ले जाया गया. पुलिस का कहना है कि उनपर आतंकवाद संबंधी आरोप लगाए जाएँगे क्योंकि जाँचकर्ताओं को उनके तार 'आतंकवाद' से जुड़े होने के पुख़्ता सबूत मिले हैं. उनका कहना है कि इंडोनेशिया और फ़िलीपीन्स में चरमपंथियों की गतिविधियों की जाँच के दौरान ये दस्तावेज़ सामने आए हैं. पुलिस ने बशीर से बुधवार को पूछताछ की कोशिश भी की मगर उन्होंने पुलिस के साथ सहयोग नहीं किया. बशीर के एक प्रवक्ता का कहना है कि ये जाँच अमरीकी दबाव में हो रही है. इकट्ठा हुए समर्थक बड़ी संख्या में बशीर के समर्थकों ने जकार्ता में सालेंबा जेल के बाहर प्रदर्शन किया. उनकी पुलिस से भिड़ंत भी हुई जिन्होंने उनको तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. बशीर के समर्थक अपने नेता पर लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हैं और उनका आरोप है कि बशीर को इंडोनेशिया सरकार ने विदेशी शक्तियों के दबाव में आकर गिरफ़्तार किया है. बाली द्वीप में हुए बम हमले के कुछ ही समय में बशीर को गिरफ़्तार कर लिया गया था. उस हमले में 202 लोग मारे गए थे. उन पर बम हमलों का सीधे तौर पर तो कभी आरोप नहीं लगा मगर उन पर जेमा इस्लामिया के आध्यात्मिक गुरू होने का आरोप ज़रूर है. |
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