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ईसाइयों और मुसलमानों के बीच दंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंडोनेशियाई द्वीप एंबन में मुसलमानों और ईसाइयों के बीच फिर से भड़के दंगों में कम से कम दस लोगों के मारे जाने और साठ के घायल होने की ख़बर है. यह हिंसा तब फैली जब एक छोटे से अलगाववादी गुट ने ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से एक रैली निकालने की कोशिश की. यह गुट मुख्य रूप से ईसाई बहुल है. यह रैली वे आज़ादी हासिल करने की नाकाम कोशिश की वर्षगाँठ पर निकालने की कोशिश कर रहे थे. इस कोशिश के समय ही कुछ मुस्लिम विरोधियों से उनका टकराव हो गया. एंबन मलूकुस द्वीप श्रंखला में एक मुख्य द्वीप है और वहाँ 2002 में शांति समझौता होने से पहले क़रीब तीन साल तक ख़ूनी संघर्ष चला था. इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में बीबीसी संवाददाता रिशेल हार्वी का कहन है कि मामला एक छोटे से प्रदर्शन के रूप में शुरू हुआ जिसने आनन-फानन में एक दंगे का रूप ले लिया. एंबन में मुख्य रूप से ईसाई और मुसलमान रहते हैं और यह टकराव होने पर सड़कों पर आम दंगे होने लगे. बहुत सी इमारतों और वाहनों को आग लगा दी गई. उनमें संयुक्त राष्ट्र का एक दफ़्तर और एक चर्च भी शामिल है. मौक़े पर मौजूद लोगों का कहना है कि उन्होंने ऊँची इमारतों में से अंधाधुंध गोली चलते देखीं. एंबन के मेयर जोफ़ी पपिलाया ने एक गुट पर इस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार बताया. ताज़ा समाचार मिलने तक पपिलाया ने स्थिति को नियंत्रण में बताया था. स्थिति से निपटने के लिए और पुलिस बल माँगा गया है और लोगों से घरों में ही रहने के लिए कहा गया है. 2002 में शांति समझौता होने में एंबन द्वीप ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ताज़ा हिंसा से यह ज़ाहिर हो गया है कि वह शांति समझौता कितना खोखला है. |
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