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यूरोपीय संघ 'संविधान' पर जनमत संग्रह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने ये घोषणा की है कि उनकी सरकार यूरोपीय संघ के प्रस्तावित नए संविधान पर जनमत संग्रह करवाएगी. लेकिन फ़िलहाल इसकी कोई तिथि निश्चित नहीं की गई है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संकेत मिले हैं कि जनमत संग्रह ब्रिटेन में अगले आम चुनाव के बाद ही हो पाएगा. ये ब्रिटेन में लेबर सरकार की नीति में एक बड़ा बदलाव है. कई महीनों से प्रधानमंत्री ब्लेयर जनमत संग्रह की ज़रूरत को मानने से इनकार करते रहे हैं. पहले वो इस बात पर अड़े हुए थे कि यूरोपीय संघ के प्रस्तावित संविधान पर विचार और अनुमोदन एक संसदीय मामला है. लेकिन मंगलवार को वो अपने विचार से बिल्कुल पलट गए और ये माना कि जनमत संग्रह की ज़रूरत है. उनका कहना था कि अब ये समय आ गया है कि जनता को इस पर अपने विचार व्यक्त करने का मौक़ा दिया जाए. पूरी प्रक्रिया से इस बारे में अंतिम फ़ैसला होगा कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ में पूरे अधिकारों के साथ बना रहना चाहता या फिर उससे अलग-थलग पड़ा रहना चाहता है. प्रधानमंत्री ब्लेयर ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि नई संधि में वीटो का राष्ट्रीय अधिकार बरक़रार रहेगा. उनके अनुसार यूरोपीय संघ के 15 से 25 देशों तक के विस्तार को देखते हुए ये संधि ज़रूरी है. लेकिन बीबीसी के राजनीतिक संपादक ऐंड्रयू मार का कहना है,"अगर जनमत संग्रह में ब्लेयर हार जाते हैं तो उन्हे भारी नुक़सान हो सकता है. ये भी हो सकता है कि उन्हे अपना पद छोड़ना पड़े." यूरोपीय संघ के संविधान की रूपरेखा पिछले साल तैयार की गई थी लेकिन संघ के नेता अभी तक उसको अंतिम रूप देने के मामले पर सहमत नहीं हो पाए हैं. |
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