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अंतरिम संविधान पर सहमति के संकेत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अंतरिम संविधान पर सहमति होने के संकेत मिले हैं. इराक़ी शासकीय परिषद के कुछ सदस्यों ने शिया नेता आयतुल्ला अल सिस्तानी से बातचीत की और अब उम्मीद है सोमवार को इस पर हस्ताक्षर हो जाएँगे. इसकी घोषणा इराक़ी शासकीय परिषद के एक सदस्य मोवफ़्फ़िक़ अल रूबाई ने की. शिया नेताओं की आपत्ति के कारण पिछले शुक्रवार को इस पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए थे. शिया नेताओं ने अंतरिम संविधान के कई विंदुओं पर आपत्ति की थी. शुक्रवार को परिषद के शिया सदस्यों ने पूर्व सहमत संविधान में आख़िरी समय में दो महत्वपूर्ण संशोधन करने पर ज़ोर दिया इसके बाद ही हस्ताक्षर करने में रुकावट आ गई. ऐतराज़ दरअसल ये सदस्य माँग कर रहे थे कि राष्ट्रपति पद की ज़िम्मेदारी एक छोटी सी परिषद को दी जानी चाहिए जिसमें तीन शिया, एक सुन्नी और एक कुर्द प्रतिनिधि हों.
पहले सहमति हुई थी कि एक राष्ट्रपति होगा और दो उपराष्ट्रपति. ये सदस्य स्थायी संविधान की मंज़ूरी की प्रक्रिया पर भी कुछ आपत्ति कर रहे हैं. अंतरिम संविधान में व्यवस्था की गई है कि स्थायी संविधान में अगर इराक़ को एक इस्लामी राज्य बनाने की कोशिश की जाती है तो सुन्नियों, कुर्दों और उदारवादी शियाओं को उस पर वीटो करने का अधिकार होगा. अंतरिम संविधान में व्यवस्था की गई है कि अमरीका इसी साल 30 जून तक सत्ता इराक़ियों को सौंप देगा. जबकि बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अंतिरम संविधान के मसौदे में यह नहीं बताया गया है कि सत्ता किसको और किस तरह सौंपी जाएगी. अंतरिम संविधान तब तक लागू रहेगा जब तक कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई एक संसद नया संविधान नहीं बना लेती. वही देश का स्थायी संविधान होगा. |
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