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शुक्रवार, 20 फ़रवरी, 2004 को 14:57 GMT तक के समाचार
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चीन के बारे में जानकारियाँ
चीन का नक्शा
दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश चीन का इतिहास चार हज़ार वर्ष से अधिक पुराना है.

कागज़, बारूद, कपास और कागज़ी मुद्रा जैसी चीज़ें, जिन्हें आधुनिक समाज की नींव समझा जाता है, सबसे पहले चीन ही में देखने में आईं.

माओत्से तुंग के नेतृत्व में चीन में साम्यवाद की स्थापना हुई. साम्यवाद के पहले दो दशकों में अर्थव्यवस्था में बहुत प्रगति देखने को नहीं मिली. लेकिन अस्सी के दशक से शुरू हुई उदारीकरण की प्रक्रिया ने चीन को दुनिया की सबसे तेज़ी से विकास कर रही अर्थव्यवस्था बना दिया है.

चीन सरकार ने सबसे पहले सामूहिक खेती समाप्त कर निजी क्षेत्र को इस क्षेत्र में आने का मौक़ा दिया. इसके बाद से चीनी अर्थव्यवस्था में निजी कंपनियों की भागेदारी लगातार बढ़ती रही है और आज चीन दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से है.

कुछ तथ्य
जनसंख्या – 1.3 अरब (संयुक्त राष्ट्र, 2003)
राजधानी – बीजिंग
मुख्य भाषा – मेंडरीन
मुख्य धर्म – बौद्ध, ईसाई, इस्लाम, ताओ
औसत आयु – 69 वर्ष (पुरुष), 73 वर्ष (महिलाएं) (संयुक्त राष्ट्र)
मुद्रा – एक रिनमिन्बी (युआन) = 10 जियाओ = 100 फेन
निर्यात की मुख्य वस्तुएँ – कपड़ा, बिजली, कंप्यूटर और अन्य सामान
औसत आय – 890 अमरीकी डॉलर (विश्व बैंक, 2001)
इंटरनेट डोमेन - .cn
अंतरराष्ट्रीय डायलिंग कोड - +86

आप दुनिया के किसी भी हिस्से में चले जाएँ, चीन में बनी चीज़ें आपको ज़रूर नज़र आ जाएँगी.

विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता चीन की स्थिति और मज़बूत करेगी. उसके उत्पादों को दुनिया भर के देशों में नए बाज़ार मिलेंगे. लेकिन साथ ही उसे अपने बाज़ार भी इन देशों के उत्पादों के लिए खोलने पड़ेंगे.

कुछ लोगों का कहना है कि इससे जहाँ निजी क्षेत्र को बल मिलेगा, वहीं देश में बेरोज़गारी और अस्थिरता बढ़ने का भी ख़तरा है.

फ़िलहाल देश की कम्युनिस्ट पार्टी ने सत्ता पर पहले जैसी ही मज़बूत पकड़ बना रखी है. किसी तरह के भी राजनीतिक विरोध से कड़ाई से निबटा जाता है और विरोधी नेताओं को कड़ा कारावास भुगतना पड़ता है.

मानवाधिकार संस्थाओं का आरोप है कि चीन में अब भी हर वर्ष कई लोगों को मौत की सज़ा दी जाती है.

इसके अलावा तिब्बत पर चीन के शासन को लेकर भी विवाद है. आलोचकों का कहना है कि चीनी अधिकारी एक सोची-समझी रणनीति के तहत तिब्बत की बौद्ध संस्कृति को बर्बाद कर रहे हैं और निर्वासन में रह रहे तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के समर्थकों को तंग कर रहे हैं.

नेता

मार्च 2003 में चीन की नेशनल पीपुल्स काँग्रेस ने जब हु जिंताओ को राष्ट्रपति चुना तो उनके बारे में बहुत कुछ पता नहीं था.

नेतृत्व
उपराष्ट्रपति – ज़ेंग किंगहॉन्ग
प्रधानमंत्री – वेन ज़ियाबाओ
विदेश मंत्री – ली ज़ाओसिंग
नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के अध्यक्ष – वू बांगू

जिंताओ 1964 से कम्यूनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं और सत्तर के दशक में उनके कैरियर में अचानक तेज़ी आई. अस्सी के दशक में वे ग्वीज़ू और तिब्बत में कम्युनिस्ट पार्टी के नेता थे.

वर्ष 1992 में उन्हें पार्टी पोलित ब्यूरो का सबसे कम उम्र वाला सदस्य बनने का मौक़ा मिला. इस नियुक्ति से पार्टी में उनके भविष्य का इशारा मिल गया था लेकिन 2002 में हू जिंताओ को आधिकारिक तौर पर पार्टी का नेता चुन लिया गया.

हू जिंताओ का जन्म 1942 में अनहुई प्रांत में हुआ था. उन्होंने बीजिंग विश्विद्यालय में हाइड्रोइलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग पढ़ी और इसके बाद जल मंत्रालय में काम करना शुरू किया.

कहा जाता है कि उन्हें नाचने और टेबल-टेनिस खेलने का शौक़ है. कम्युनिस्ट पार्टी के वफ़ादारी के अलावा उनकी याददाश्त और उनका दिमाग और राजनितिक समझ उनकी सफलता का कारण मानी जाती है.

संचार माध्यम

चीन में समाचार माध्यमों पर कड़ा नियंत्रण है. इसके अलावा सरकार विदेशी प्रसारकों के रेडियो चैनल और वेबसाइट को चीन में सुने या देखे जाने से रोकती है.

चीनी अख़बार
रेनमिन रिबाओ – सरकारी समाचार-पत्र
चाइना डेली – अंग्रेज़ी समाचार-पत्र
जेफांगुन बाओ – पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का समाचार-पत्र
फ़ाज़ी रिबाओ – क़ानूनी मामलो का अख़बार
गॉन्ग्रेन रिबाओ – कर्मचारियों का अख़बार
नॉन्गमिन रिबाओ – किसानों का अख़बार
हालाँकि चीनी समाचार माध्यम अधिकारियों के भ्रष्टाचार की ख़बरें देते रहते हैं लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के देश में एकछत्र राज्य पर कोई भी उँगली नहीं उठाता है.

चीनी जनता के लिए टेलीविज़न ही समाचार का मुख्य माध्यम है और इस क्षेत्र में मुक़ाबला कड़ा है – ख़ासकर शहरों में.

अधिकारियों के अनुसार 2002 में टीवी देखने वालों की संख्या 1.1 अरब थी. इसके अलावा सैटेलाइट और केबल टेलीविज़न देखने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है.

वर्ष 2010 तक ऐसे लोगों की संख्या 12.8 करोड़ तक पहुँच जाने की संभावना है.

वैसे इस तरह के चैनलों की संख्या अभी कम ही है. एओएल टाइम वार्नर, रूपर्ट मर्डॉक की न्यूज़क़ॉर्प के अलावा फ़िनिक्स टीवी को अपने चैनल दिखाने की अनुमति है.

बदले में चीनी सेंट्रल टीवी के अंग्रेज़ी भाषा के कार्यक्रम ब्रिटेन और अमरीका में देखे जा सकते हैं. चीन का कहना है वो सिर्फ़ ऐसे चैनल दिखाने की अनुमति देगा जिससे उसकी “सुरक्षा” को ख़तरा न हो.

चीन में इंटरनेट पर भी नियंत्रण है लेकिन इसके बावजूद इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या पिछले साल के मध्य तक लगभग सात करोड़ पहुँच चुकी थी.

बीबीसी जैसे अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठनों की वेबसाइट के अलावा मानवाधिकार गुटों और फ़ालुनगॉन्ग धार्मिक समुदाय की वेबसाइटों पर भी पाबंदी है.

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