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अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव और मुसलमान
इस वर्ष अमरीका में होनेवाले राष्ट्रपति चुनाव में वहाँ की मुस्लिम आबादी अहम भूमिका निभा सकती है. अमरीका में वैसे जनगणना में धर्म का हिसाब नहीं रखा जाता मगर अनुमान है कि वहाँ 12 लाख से 70 लाख मुसलमान हैं. अमरीका में पिछली बार हुए राष्ट्रपति चुनाव का अनुभव ये बताता है कि वहाँ काफ़ी कम वोट भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. ओहियो राज्य अमरीका और इस्लाम के बारे में काम करनेवाली एक संस्था का कहना है कि 2000 के चुनाव में यहाँ के मुसलमानों की अधिकाँश आबादी ने जॉर्ज डब्ल्यू बुश की कंज़रवेटिव पार्टी का साथ दिया था. मगर 11 सितंबर 2001 के बाद से मुसलमान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. हमले और भेदभाव
ओहियो के संगठन अमरीका-इस्लाम संबंध परिषद के अनुसार 2002 में मुसलमानों पर होनेवाले हमलों की संख्या में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई. संस्था का कहना है कि मुसलमानों को अमरीका के साथ अपनी निष्ठा साबित करने के लिए हर दिन 11 सितंबर को हुए हमलों की निंदा करनी पड़ रही है. संस्था के लोग बताते हैं कि उन्हें केवल आम अमरीकी से ही परेशानी नहीं हो रही. उनका कहना है कि उन्हें ऐसा लगता है कि वे उन लोगों के बंधक जैसे हैं जो उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार हैं. अमरीका में रहनेवाले कई मुसलमान मानते हैं कि उन्हें बेवजह 11 सितंबर के हमले के बाद अमरीका में आतंकवाद की रोकथाम के लिए बने क़ानूनों का निशाना बनाया जा रहा है. राजनीतिक असर
बहुत सारे अमरीकी मुसलमान ये मानते हैं कि जब तक राष्ट्रपति बुश कुछ बहुत विशेष नहीं करते तब तक रिपब्लिकन पार्टी को मुसलमानों का वैसा समर्थन नहीं मिल सकता जैसा कि 2000 में मिला था. न्यू हैंपशायर राज्य में रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े सग़ीर ताहिर आगामी चुनाव में रिपब्लिकनों के प्रदर्शन को लेकर चिंतित हैं. वे कहते हैं,"मुझे चिंता है कि कहीं मुसलमानों पर उल्टा असर ना पड़े. मगर मैं समझता हूँ कि पार्टी उनके साथ अपनी दूरियों को ख़त्म करने की कोशिश ज़रूर करेगी". अमरीका में राजनेता इस्लाम के बारे में बहुत खुलकर नहीं बोलते मगर इस बार डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनने की दौड़ में शामिल कॉंग्रेस सदस्य डेनिस कुसिनिच मुसलमानों को संगठित होकर अपनी शक्ति दिखाने को कह रहे हैं. कुसिनिच कहते हैं,"11 सितंबर की घटना से सारे देश के साथ अमरीकी मुसलमानों को भी नुक़सान हुआ है मगर उनको बलि का बकरा भी बनाया गया और ऐसी क़ानूनी व्यवस्थाओं में खींचा गया जिनकी लोकतंत्र में आवश्यकता ही नहीं है". अमरीकी संसद में मुसलमानों का कोई प्रतिनिधि नहीं है. अब उन्हें लग रहा है कि राजनीतिक अखाड़े में नया होने के बावजूद उनको अपनी ताक़त दिखाने का अवसर मिला है जिससे वे और परिपक्व हो सकते हैं. |
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