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'अमरीकी प्रस्तावों का विरोध रोक दें'
इराक़ में शियाओं के धार्मिक नेता आयतुल्ला अली अल-सिस्तानी ने अपने समर्थकों से कहा है कि सत्ता सौंपने की अमरीकी योजनाओं के विरुद्ध प्रदर्शन बंद कर दिए जाएँ. उधर इराक़ में संयुक्त राष्ट्र की वापसी की संभावनाएँ तलाश करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का दो सदस्यीय दल बग़दाद पहुँच गया है. अल-सिस्तानी की ये घोषणा उस समय आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने इराक़ में संयुक्त राष्ट्र की वापसी के बारे में जल्दी ही घोषणा करने के लिए कहा है. धार्मिक नेता के एक प्रवक्ता ने बताया कि अल-सिस्तानी जल्दी चुनाव कराने की माँग में हो रहे इन प्रदर्शनों पर रोक चाहते हैं. वह बिना चुनी हुई किसी सरकार को लाने के विरोधी हैं. मगर उन्होंने ये संकेत दिए हैं कि अगर संयुक्त राष्ट्र चुनाव की संभावनाओं के बारे में विचार करने के लिए कोई दल भेजता है तो वह इस बारे में किसी समझौते पर सोच सकते हैं. बग़दाद स्थित संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर जब पिछले साल अगस्त महीने में हमला हुआ था उसके बाद ही संयुक्त राष्ट्र ने सभी अधिकारियों को वहाँ से वापस बुला लिया था. गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ सलाहकार लखदर ब्राहिमी ने इराक़ के मसले पर अमरीका में शीर्ष अधिकारियों से बातचीत की. उधर अल-सिस्तानी ने ज़ोर दिया है कि इराक़ में वैध सरकार तो वही होगी जनता जिसे चुनेगी. मगर उनके एक प्रतिनिधि के अनुसार अब उनका कहना है कि इस बारे में जब तक संयुक्त राष्ट्र की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती तब तक कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होने चाहिए. प्रवक्ता ने कहा, "उसके बाद हम अपनी बात कहेंगे." संयुक्त राष्ट्र ने उन अधिकारियों का नाम नहीं बताया है जो इराक़ गए हैं मगर उन्हें सैनिक सलाहकार बताया गया है. बीबीसी के मध्य पूर्व मामलों के संवाददाता रोजर हार्डी का कहना है कि लगभग साढ़े तीन दशक तक देश में तानाशाही के बाद लोकतंत्र की बात लोगों को काफ़ी रोमाँचित करती है. अमरीका ने जो समय सारिणी निर्धारित की है उसके अनुसार जून में इराक़ में एसेंबली एक सरकार का गठन करेगी जो कि अमरीकी प्रशासन से सत्ता ले लेगी. इस पर अल-सिस्तानी का कहना है कि एसेंबली के सदस्यों का चुनाव होना चाहिए. |
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