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भारत से सहयोग बढ़ाएँगे- बुश
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारत के साथ उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की घोषणा की है. इनमें नागरिक उपयोग के परमाणु और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं. बुश की घोषणा एक बयान के रूप में आई है. दूसरी ओर भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका स्वागत करते हुए इसे एक 'महत्वपूर्ण मील का पत्थर' कहा है. अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा, "इन क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों के वाणिज्यिक और दोस्ताना रिश्तों में मज़बूती आएगी." उन्होंने कहा कि इससे एशिया और अन्य इलाक़ों में स्थिरता भी बढ़ेगी. दोनों देशों के संबंधों के समान हितों पर आधारित होने की बात करते हुए बुश ने कहा, "हम विश्व शांति और समृद्धि बढ़ाने के लिए मिल कर काम कर रहे हैं." उन्होंने कहा है कि यह क़दम अमरीका-भारत संबंधों में बदलाव की दिशा में मील के पत्थर के समान है.
अमरीका में जॉर्जिया विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अनुपम श्रीवास्तव बुश प्रशासन के भारत के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के प्रयासों से जुड़े रहे हैं. उन्होंने बीबीसी हिंदी सेवा को बताया कि राष्ट्रपति बुश की घोषणा पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच साल भर से जारी बातचीत का नतीजा है. प्रोफ़ेसर श्रीवास्तव ने कहा, "चार प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की बात है. ये क्षेत्र हैं- अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सुरक्षा का मामला, मिसाइल सुरक्षा योजना और दोहरे उपयोग वाली उच्च प्रौद्योगिकी." राष्ट्रपति बुश की ताज़ा घोषणा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने पर हुई सहमति के कुछ ही दिन बाद आई है. भारत ने स्वागत किया भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका स्वागत करते हुए इसे एक 'महत्वपूर्ण मील का पत्थर' कहा है. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संबंघ बढ़ने के साथ ही दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंध बढ़ेगा और दोस्ती बढ़ेगी. भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि इससे एशिया और इसके बाहर भी स्थिरता आएगी. भारत-पाकिस्तान संबंध प्रोफ़ेसर श्रीवास्तव के अनुसार उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-अमरीका सहयोग पर सहमति डेढ़ महीने पहले ही बन गई थी, लेकिन सार्क शिखर सम्मेलन में भारत-पाकिस्तान बातचीत की संभावना को देखते हुए इसकी घोषणा नहीं की गई थी.
अमरीकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बाद में इस बात से इनकार किया कि यह कश्मीर मसले पर बातचीत के लिए तैयार होने के बदले भारत को दिया गया पुरस्कार है. लेकिन वाशिंग्टन से बीबीसी संवाददाता जॉन लीनी के अनुसार दक्षिण एशिया में अनेक विशेषज्ञ इसे भारत को दिए गए पुरस्कार के रूप में ही देखना चाहेंगे. उल्लेखनीय है कि बुश प्रशासन एक अरसे से पाकिस्तान से अपने संबंधों को प्रभावित किए बिना उसके पड़ोसी भारत के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता लाने का प्रयास करता रहा है. अमरीका ने भारत के साथ अनेक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव किया है. लेकिन अमरीका का इस बात पर ज़ोर है कि परमाणु हथियारों या मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग नहीं किया जाएगा. वास्तव में उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग काफ़ी कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत महाविनाश के हथियारों के प्रसार के ख़िलाफ़ क्या कदम उठाता है. |
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