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पॉवेल ने अपनी रिपोर्ट को सही ठहराया
अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने संयुक्त राष्ट्र में पेश अपनी उस रिपोर्ट को सही ठहराया है जिसमें कहा गया था कि इराक़ महाविनाश के हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है. बुधवार को अमरीका के एक प्रभावशाली शोध संस्थान ने अमरीकी प्रशासन के अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने महाविनाश के हथियारों से ख़तरे के बारे में बढ़ा चढ़ाकर इराक़ पर आरोप लगाए थे. कार्नेगी फ़ाउंडेशन का कहना है कि उन्होंने ख़ुफ़िया एजेंसियों की दी हुई जानकारी का बहुत ध्यान से अध्ययन किया है. फ़ाउंडेशन के अनुसार ख़ुफ़िया एजेंसियों को वर्ष 2002 तक ये अंदेशा तो था कि इराक़ के पास कुछ ख़तरनाक हथियार हैं, लेकिन वो मानते रहे कि इराक़ के पास निचले स्तर के यानि “कम ख़तरनाक” हथियार हैं. फ़ाउंडेशन का कहना है कि 2002 तक तो परमाणु हथियारों का नाम तक ये ख़ुफ़िया एजेंसियाँ नहीं ले रहीं थीं. लेकिन वर्ष 2002 में अमरीकी संसद को फ़ैसला लेना था कि इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा जाए या नहीं, और इसके दस दिन पहले स्थिति अचानक बदल गई. कार्नेगी फ़ाउंडेशन के जो सिरिनेसियोने कहते हैं, “अचानक इराक़ के ख़िलाफ़ आरोपों में एक नाटकीय बदलाव आ गया. और वो भी बिना किसी नए सबूत के.”
अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल का कहना है कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में जो भी कहा वो सच है. उन्होंने कहा, “सच्चाई तो ये है कि इराक़ के पास महाविनाश के हथियार थे और महाविनाश के हथियार बनाने का कार्यक्रम था. इराक़ ने इन हथियारों का इस्तेमाल अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ किया था और ईरान के ख़िलाफ़ भी. ये एक सच्चाई है.” पॉवेल ने माना कि अभी इराक़ के पास महाविनाश के हथियार होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं लेकिन उनका कहना था कि युद्ध से पहले इस जानकारी पर विश्वास करना सही था. पॉवेल ने कहा कि 80 के दशक से ही इराक़ के पास महाविनाश के हथियार थे लेकिन उसने पिछले दस साल में दुनिया को ये तय करने का कोई मौका नहीं दिया कि उसके पास ये हथियार हैं या नहीं. |
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