BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 29 दिसंबर, 2003 को 05:00 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
"ज़िंदगी और मौत का फ़ासला कम था"
रूथ मिलिंगटन

ईरान में आए भूकंप ने हज़ारों लोगों की जान ले ली लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जो मौत के मुँह से बचने में कामयाब हो गए.

मौत के शिकंज से बचने की इस जद्दोजहद में हालाँकि उन लोगों ने मौत को बहुत नज़दीक से देखा और उन्होंने महसूस किया कि उनकी ज़िंदगी और मौत के बीच फ़ासला बहुत कम रह गया था.

ऐसी ही एक ब्रितानी महिला इस प्राकृतिक आपदा में ख़ुद की ज़िंदगी को मौत के चंगुल से बचाने में कामयाब हो गई.

34 वर्षीय रूथ मिलिंगटन ईरान के बाम शहर में एक होटल में ठहरी हुई थी कि भूकंप ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया.

इस महिला की ख़ुशक़िस्मती ही कहा जाएगा कि वह जिस कमरे में ठहरी हुई थीं सिर्फ़ वह थोड़ा बहुत बचा और बची पूरे होटल की सिर्फ़ एक दीवार.

रूथ मिलिंगटन नाम की इस महिला ने बीबीसी को बताया, "तमाम खिड़कियाँ और दरवाज़े बिल्कुल टूट-फूट चुके थे."

रूथ का कहना था कि जब उन्होंने ख़ुद को मलबे में दबा पाया तो कुछ सूझा ही नहीं सिर्फ़ ईश्वर को पुकारने के सिवाय.

उन्होंने सुबह होने का इंतज़ार किया ताकि रौशनी होने पर ख़ुद को बाहर निकालने की कुछ कोशिश की जाए.

"सुबह क़रीब सात बजे कुछ दिखाई देना शुरू हुआ और मैंने देखा कि मेरे पास ही पलंग के नीचे कुछ दबा हुआ है जिसमें हलचल हो रही थी."

ज़िंदगी की गुहार

 उसके मुँह से सिर्फ़ इतनी आवाज़ निकल पाई, 'मेरी टाँगें बिल्कुल दबी हुई हैं, ख़ुदारा किसी तरह मुझे यहाँ से निकाल लो.

रूथ ने कहा, "मैं ख़ुद को निकालने में किसी तरह कामयाब हो गई और मैंने उस हलचल की तरफ़ रुख़ किया. मैंने किसी का सिर देखकर उसपर हाथ रखा तो देखा कि उसका मुँह नीचे की तरफ़ था."

"उसके मुँह से सिर्फ़ इतनी आवाज़ निकल पाई, 'मेरी टाँगें बिल्कुल दबी हुई हैं, ख़ुदारा किसी तरह मुझे यहाँ से निकाल लो."

रूथ को यह नहीं पता चल सका कि आदमी जीवित बच सका या नहीं.

रूथ को ईरान की राजधानी तेहरान पहुँचाया जा चुका है जहाँ उनका इलाज किया जा रहा है.

रूथ बताती हैं कि चारों तरफ़ तबाही ही तबाही नज़र आ रही थी.

लोग मलबे से अपने मृतक परिजनों को निकाल रहे थे, कुछ इस उम्मीद में मलबे की तलाश कर रहे थे कि शायद उनके प्रियजन जीवित बच सकें.

लेकिन कुछ लोग शायद रूथ की तरह भाग्यशाली नहीं थे और शुक्रवार का सूरज नहीं देख सके.

इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>