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गुरुवार, 18 दिसंबर, 2003 को 23:42 GMT तक के समाचार
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बुश को लगा दोहरा क़ानूनी झटका
जोस पैडिला
दुश्मन क़ैदी के रूप में रखे गए हैं अमरीकी नागरिक जोस पैडिला

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को ग्वांतानामो के क़ैदियों और अमरीकी जेल में बंद एक कथित चरमपंथी के अधिकारों को लेकर दो अलग-अलग अदालती आदेशों से झटका लगा है.

एक अपीलीय अदालत ने फ़ैसला सुनाया है कि अधिकारियों को देश में ही पकड़े गए एक अमरीकी नागरिक को दुश्मन के रूप में हिरासत रखने का कोई अधिकार नहीं है.

एक अन्य अदालत ने कहा है कि क्यूबा के ग्वांतानामो बे में अमरीकी सेना की हिरासत में मौजूद क़ैदियों को वकील उपलब्ध कराए जाने चाहिए.

ज़ाहिर है इन दोनों फ़ैसलों से बुश प्रशासन की आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई की नीति को गहरा झटका लगा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है उच्चतर अदालतों में इन्हें बदला जा सकता है.

न्यूयॉर्क की अपीलीय अदालत ने फ़ैसला दिया कि जोस पैडिला नामक अमरीकी नागरिक को सेना की जेल में बेमियादी हिरासत में नहीं रखा जा सकता.

उल्लेखनीय है कि पैडिला को शिकागो हवाई अड्डे पर पकड़ा गया था. उन पर अधकचरे रेडियोधर्मी विस्फोटक या डर्टी बम लगाने के आरोप लगाए गए हैं.

एक राष्ट्रपतीय अध्यादेश के तहत उन्हें साउथ कैरोलाइना की एक जेल में दुश्मन क़ैदी के रूप में जून 2002 से बंद रखा जा रहा है.

माना जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध काल के बाद पैडिला वैसे पहले अमरीकी हैं जिन्हें राष्ट्रपति के अध्यादेश के तरह हिरासत में रखा गया है.

जजों ने कहा कि पैडिला को रिहा किया जाना चाहिए या फिर सरकार चाहे तो उसे असैनिक न्यायाधिकरण के तहत हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू करे.

राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने फ़ैसले पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय विभाग इसके ख़िलाफ़ अपील करेगा.

कैम्प डेल्टा

इससे फ़ैसले से कुछ ही देर पहले एक अमरीकी सर्किट कोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा कि क्यूबा के ग्वांतानामो बे की जेल कैम्प डेल्टा में बंद लोगों को वकीलों की सुविधा दी जानी चाहिए.

कैम्प डेल्टा
कैम्प डेल्टा के क़ैदियों की दशा पर दुनिया भर में मानवाधिकारवादी चिंतित

अमरीकी सरकार कहती रही है कि कैम्प डेल्टा के क़ैदियों को अनिश्चित काल तक बिना किसी क़ानूनी कार्रवाई के हिरासत में रखा जा सकता है.

अफ़ग़ानिस्तान में पकड़े गए एक लीबियाई नागरिक के मामले में आए इस फ़ैसले में कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों को तो छोड़ें, राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी देशी-विदेशी सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए.

अदालत ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में कार्यपालिका को न्यायपालिका का काम अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि अमरीकी सुप्रीम कोर्ट पहले ही ग्वांतानामो बे मामले की जाँच कर रही है.

संवाददाताओं के अनुसार ताज़ा फ़ैसले बुश प्रशासन की नीतियों के प्रति न्यायपालिका में बढ़ती बेचैनी की सूचक मानी जा सकती है.

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