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लॉकरबी मामले में सज़ा सुनाई
लॉकरबी कांड में दोषी क़रार दिए गए अब्देल बसत अली मोहम्मद अल मेगराही को कम से कम 27 साल क़ैद में गुजारने होंगे. लेकिन क़ैद के 27 साल 1999 से जोड़े जाएँगे जब उन्हें पहली बार हिरासत में लिया गया था. दिसंबर 1998 में पैन एम फ़्लाइट नंबर 103 स्कॉटलैंड के लॉकरबी शहर के ऊपर विस्फोट से उड़ गया था जिसमें 270 लोग मारे गए थे. लीबियाई सीक्रेट सर्विस के एजेंट मेगराही को पैम एम विमान में हुए विस्फोट में मारे गए 270 लोगों की मौत का ज़िम्मेदार माना गया और दो साल पहले हॉलैंड में 84 दिनों तक चली सुनवाई के बाद स्कॉटिश क़ानून के तहत दोषी ठहराया गया था. साथ में यह भी सिफारिश की गई थी कि उन्हें कम से कम 20 साल क़ैद में गुजारने होंगे. नए यूरोपीय क़ानून के मुताबिक़ उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे लोगों को सज़ा की अवधि बताना ज़रूरी है. नए क़ानून के तहत फ़ैसला सोमवार को ग्लासगो में इस मामले पर सिर्फ़ चार मिनट की सुनवाई हुई और नए यूरोपीय क़ानून के आधार पर यह फ़ैसला सुनाया गया कि 51 वर्षीय मेगराही को 2026 से पहले रिहा नहीं किया जा सकता है.
इस बार भी सुनवाई के लिए वही जज मौजूद थे, जिन्होंने 2001 में मेगराही को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. विमान विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजन भी अदालत में मौजूद थे. मेगराही को मार्च 2002 से ग्लासगो के बार्लीनी जेल में रखा गया है. मेगराही की वकील मारग्रेट स्कॉट ने जजों को बताया कि मेगराही अभी भी यही मानते हैं कि वे इस मामले में निर्दोष हैं. स्कॉट ने स्पष्ट किया कि इसके अलावा उन्हें अदालत से कुछ नहीं कहना है. लेकिन जजों ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा, "यह बिल्कुल स्पष्ट है कि पूरी जानकारी में इस कांड को अंज़ाम दिया गया." जजों ने संकेत दिया कि मेगराही को 30 साल क़ैद में रखने की सज़ा सुनाई जा सकती थी, लेकिन उनकी उम्र का लिहाज किया गया और इस बात का भी कि वे विदेश में सज़ा काट रहे हैं. |
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