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आज होगा फ़ैसला विजेता का
ऐसा लगता है कि क्रिकेट वर्ल्ड कप 2003 का फ़ाइनल दोबारा खेले जाने की तैयारी है. लेकिन इस बार जॉहानसबर्ग में नहीं बल्कि कोलकाता के ईडन गार्डन मैदान पर. भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें मंगलवार को खेले जाने वाले त्रिकोणीय प्रतियोगिता के फ़ाइनल में कोलकाता में दोबारा आमने-सामने होंगी. वर्ल्ड कप तो अगले चार साल तक ऑस्ट्रेलिया से कोई नहीं छीन सकता लेकिन भारत के पास ये सुनहरा मौक़ा है फ़ाइनल में हुई हार का बदला लेने का. लेकिन भारत के लिए बुरी ख़बर ये है कि पिछले मैच में गांगुली की जांघ की मांसपेशी में खिंचाव आ गया था जिससे उनके खेलने पर सवालिया निशान लगा हुआ है. इस बारे में आख़िरी फ़ैसला मंगलवार को ही होगा जब उनका फ़िटनेस टेस्ट होगा. टीमें
भारतीय टीम के लिए शुभ संकेत है सलामी बल्लेबाज़ों सचिन तेंदुलकर और वीरेन्दर सहवाग की ज़बर्दस्त फ़ॉर्म. सचिन तो इस प्रतियोगिता में शुरू से ही धूम मचाए हुए हैं और उनके बल्ले से दो धमाकेदार शतक भी निकल चुके हैं. इन दोनों के बाद बल्लेबाज़ी का भार आएगा कप्तान सौरभ गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड और युवराज सिंह पर. माना जा रहा है कि मोहम्मद कैफ़ और अनिल कुंबले को आराम दिया जाएगा. ऑस्ट्रेलिया का मज़बूत बैटिंग लाइन-अप देखते हुए गांगुली इस बार अपनी गेंदबाज़ी मज़बूत रखने पर ध्यान दे सकते हैं. पर्यवेक्षक मानते हैं कि वो ज़हीर ख़ान, आविष्कार साल्वी, अजित आगरकर, हरभजन सिंह और मुरली कार्तिक के रूप में पाँच गेंदबाज़ों के साथ उतर सकते हैं. दूसरी ओर लगता है अपने शीर्ष गेंदबाज़ों के बग़ैर ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाज़ी पर ही ज़्यादा ज़ोर देगा. सलामी बल्लेबाज़ मैथ्यू हैडन, विकेट कीपर एडम गिलक्रिस्ट और रिकी पोंटिंग का बल्ला ही उनके लिए निर्णायक साबित होगा. लेकिन उनके नए तेज़ गेंदबाज़ नेथन ब्रैकन और ब्रैड विलियम्स ने भी इस प्रतियोगिता में अच्छी गेंदबाज़ी की है. हिसाब-किताब
पिछले मैच में न्यूज़ीलैंड को 145 रन से हरा कर भारत ने अपने हौसले बुलंद किए हैं. इस प्रतियोगिता में दोनों टीमों के बीच तीन मैच हुए हैं जिनमें से एक भारत ने जीता है जबकि दो ऑस्ट्रेलिया ने. हर बार वही टीम जीती जिसने पहले बल्लेबाज़ी की. भारतीय टीम हमेशा घर में शेर रही है लेकिन ऑस्ट्रेलिया के साथ घरेलू मैदानों पर भी उसका रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है. अपने मैदानों पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ अब तक 28 वनडे मैच खेले हैं जिनमें से उसे 12 में जीत मिली है जबकि 13 में हार का मुँह देखना पडा है. वैसे कुल मिला कर देखें तो दोनों टीमें अब तक 72 एकदिवसीय मैच खेल चुकी हैं लेकिन भारत के सिर जीत का सेहरा सिर्फ़ 26 बार ही बँधा और ऑस्ट्रेलिया ने 43 बार विजय पताका फहराई. वनडे प्रतियोगिताओं के फ़ाइनल की बात करें तो दोनों टीमें आठ बार ख़िताब की लड़ाई लड़ चुकी हैं लेकिन यहाँ भी ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी रहा है. वर्ल्ड चैंपियन टीम ने आठ में से छह बार कप उठाया है जबकि भारत को सिर्फ़ दो बार ही ये मौक़ा मिला है. भारत को दोनों बार सफलता शारजाह में मिली – 1985 के रॉथमेंस कप में और 1998 के कोका-कोला कप में. |
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