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फ़्रांस में यहूदी विरोध पर रोक के उपाय
फ़्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक़ शिराक़ ने देश के शहरों की मुस्लिम आबादी वाले इलाक़ों के विकास के लिए सात अरब डॉलर की एक योजना की घोषणा की है. इन मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्रों में जीवन स्तर काफ़ी ख़राब है और माना जा रहा है कि इसी वजह से यहाँ के युवाओं में यहूदियों के ख़िलाफ़ नस्लवादी भावना घर कर रही है. इस सप्ताहांत पेरिस के उत्तर में एक यहूदी स्कूल पर बम हमला हुआ था जिसके बाद राष्ट्रपति शिराक ने अपनी मंत्रिमंडल की एक आपात बैठक की. उन्होंने फ़्रांस में इस नव यहूदी विरोधी आँदोलन का सामना करने के लिए मंत्रियों का एक आयोग गठित किया है. बढ़ते हमले पिछले कुछ दिनों से फ़्रांस में यहूदियों पर लगातार नस्लवादी हमले हुए हैं. इस साल लगभग 400 हमले हो चुके हैं. इन घटनाओं से परेशान हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ज्याक़ शिराक़ ने मंत्रिमंडल की एक बैठक बुलाई थी जिसमें इस ग्रुप को गठित करने का फ़ैसला किया गया. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रधानमंत्री याँ पिये राफ़राँ ने चेतावनी दी कि नस्लवादी हमले करने वालों के साथ सख़्ती से निपटा जाएगा. हाल में पेरिस के उत्तरी हिस्से में यहूदियों के एक स्कूल में हुई तोड़फोड़ के बारे में पुलिस का कहना था कि यह हमला सशस्त्र लोगों ने किया. संवेदनशील नस्लवाद का मामला वैसे भी राष्ट्रपति शिराक़ के लिए संवेदनशील हो गया है. पिछले दिनों इसराइल में उनके ऊपर विश्लेषकों ने आरोप लगाए थे कि उन्होंने यूरोपीय संघ को महाथिर मोहम्मद के बयान की निंदा करने से रोक दिया था जिसमें उन्होंने यहूदियों के बारे में टिप्पणियाँ की थीं. उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है और वे संकेत दे रहे हैं कि वे नस्लवादियों से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं. फ़्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्री निकोलस सरकोज़ी ने वादा किया है कि यहूदियों के स्कूल पर हमला करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. फ़्रांस में यहूदियों पर हमलों की घटना तीन साल पहले शुरु हुई थी जब फ़लस्तीनी इंतिफ़ादा (प्रतिरोध)की शुरुआत हुई थी. आंकड़े बताते हैं कि पिछसे साल पहले दस महीनों में सबसे अधिक हमले हुए जब यहूदियों और उनकी संपत्तियों पर दो सौ से अधिक हमले हुए जिसमें यहूदियों के कब्रिस्तान पर हमला भी शामिल है. इसके बाद इराक़ पर अमरीकी फ़ौजों के नेतृत्व में हमले के बाद इन घटनाओं में एक बार फिर इन घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई. सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि अपेक्षाकृत ग़रीब तबकों के युवा मुस्लिम लड़के इन मामलों में शामिल हैं क्योंकि वे कट्टरपंथी इस्लाम की ओर झुके हुए हैं और फ़लस्तीनियों के हक़ की भी बात करते हैं. |
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