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तुर्की अब इराक़ में सैनिक नहीं भेजेगा
तुर्की ने लंबे असमंजस के बाद इराक़ में सैनिक नहीं भेजने का फ़ैसला किया है. पिछले महीने तुर्की संसद ने इराक़ में शांतिरक्षक सैनिक भेजने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी थी. लेकिन तुर्की में इसका बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था और इराक़ की अंतरिम शासकीय परिषद ने भी तुर्की के फ़ैसली की कड़ी आलोचना की थी. तुर्की विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस फ़ैसले के बावजूद तुर्की इराक़ में पुनर्निर्माण कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. सलाह-मशविरा राजधानी अंकारा में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि विदेश मंत्री अब्दुल्ला गुल और अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल के बीच बातचीत के बाद यह फ़ैसला किया गया है.
गुल ने कहा, "हम शुरू से ही यह कहते रहे हैं कि हम सैनिक भेजने के लिए बहुत ज़्यादा उत्सुक नहीं है. हमने कहा था कि हम इराक़ में सैनिक उसी समय भेजेंगे जब इसका कोई इस्तेमाल हो. हमें लगता है कि अभी वहाँ ऐसी स्थिति नहीं है. इस कारण हमने यह फ़ैसला किया है." अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने कहा है कि इराक़ी लोगों की भावनाओं का ख़याल करते हुए यह फ़ैसला किया गया है. लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट किया कि तुर्की सैनिक इराक़ में भेजने के मामले पर भविष्य में स्थिति बदल भी सकती है. बाउचर ने कहा, "आगे स्थिति बदल सकती है. लेकिन फ़िलहाल ऐसी स्थिति नहीं." तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनातोलिया ने जानकारी दी है कि इस फ़ैसले के बाद तुर्की सैनिकों ने इराक़ में तैनाती को लेकर चल रही तैयारियाँ रोक दी हैं.
इस्तांबुल से बीबीसी संवाददाता निक थोर्प का कहना है कि तुर्की के सैनिकों की इराक़ में प्रस्तावित तैनाती का इराक़ी शासकीय परिषद ने विरोध किया था. शासकीय परिषद का कहना था कि पड़ोसी देश होने के नाते तुर्की की सैन्य भूमिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता. तुर्की के सैनिक भेजने के प्रस्ताव के बाद यह आशंका भी जताई जा रही थी ईरान और सीरिया जैसे देश भी इराक़ में दख़ल कर सकते हैं. क़रीब 10 हज़ार तुर्की शांतिरक्षकों की प्रस्तावित तैनाती का इराक़ के कुर्द और अरब नागरिकों ने भी विरोध किया था. |
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