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कनिष्क मामले में महत्वपूर्ण गवाही
एयर इंडिया के कनिष्क विमान विस्फोट मामले में कनाडा की अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान एक महिला गवाह ने कहा है कि प्रमुख अभियुक्त रिपुदमन सिंह मलिक ने स्वीकार किया था कि इस हादसे में उसकी भूमिका थी. इस महिला गवाह ने यह भी जानकारी दी है कि कनाडा के सिखों ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या की साज़िश के लिए लंदन में सिखों को पैसे भेजे थे. सुनवाई के दौरान रिपुदमन सिंह मलिक के साथ-साथ इस मामले के एक और अभियुक्त अजायब सिंह बागड़ी अदालत में ही मौजूद थे. अदालत के आदेश के कारण इस महिला का नाम सार्वजिनक नहीं किया जा रहा है. महिला ने बताया कि 1992 से 1997 तक वह एक सिख स्कूल में पढ़ाती थी और मलिक के साथ उसके प्रेम संबंध स्थापित हो गए थे. इस महिला गवाह के अनुसार मई 1996 में मुख्य अभियुक्त रिपुदमन सिंह ने उसके सामने कनिष्क विमान में हुए बम विस्फोट की ज़िम्मेदारी ली थी. महिला के मुताबिक़ मलिक ने उससे कहा था, "मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता है. ये सब सिख धर्म के लिए किया गया था." हादसा 23 जून 1985 को दिल्ली से वैंकूवर जा रहे कनिष्क विमान में विस्फोट हुआ था और इसमें सवार सभी 329 लोग मारे गए थे. कनिष्क विमान में लगाया बम उस समय फटा जब विमान आयरलैंड के पश्चिमी तट के ऊपर उड़ रहा था. अट्ठारह साल पहले हुए कनिष्क विमान हादसे को यात्री विमान में विस्फोट की सबसे बड़ी घटना माना जाता है. विमान में हुए बम विस्फोट में मारे गए अधिकतर कनाडा में बसे वे लोग थे जो अपने रिश्तेदारों से मिलने भारत जा रहे थे. मारे गए 329 लोगों में 60 से ज़्यादा बच्चे भी थे. इस विस्फोट के लिए कनाडा में बस चुके दो लोगों अजायब सिंह बागड़ी और रिपुदमन सिंह मलिक को प्रमुख अभियुक्त बनाया गया है. अभियोजन पक्ष का कहना है दोनों अभियुक्त सिखों के अलगाववादी आंदोलन से जुड़े थे. ये लोग 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना के घुसने की घटना का बदला लेना चाहते थे. वैंकूवर में मुक़दमे के लिए भारी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं और विशेष सुनवाई कक्ष बनाया गया है. |
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