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रूस पर जर्मनी और अमरीका को एतराज़
अमरीका और जर्मनी ने रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी युकोस पर कर बचाने के आरोपों के मामले में सरकार के रवैए पर कड़ा एतराज़ जताया है. ग़ौरतलब है कि युकोस कंपनी के प्रमुख मिख़ाइल ख़ोदोरकोव्सकी को एक सप्ताह पहले गिरफ़्तार कर लिया गया था. अमरीका और जर्मनी ने मिख़ाइल ख़ोदोरकोव्सकी की गिरफ़्तारी की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं और क़ानून की निगरानी का भरोसा माँगा है. अमरीकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने कहा है कि रूस सरकार को इन अटकलों को ख़ारिज करना होगा कि युकोस प्रमुख की गिरफ़्तारी राजनीति से प्रेरित है. मिख़ाइल ख़ोदोरकोव्सकी रूस के सबसे अमीर उद्योगपति माना जाता है. कहा जाता है कि वे रूस के छोटे-छोटे विपक्षी दलों को राजनीतिक चंदा देते थे. संवाददाताओं का कहना है कि शायद इसी वजह से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार ने मिख़ाइल ख़ोदोरकोव्सकी के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई की है. जर्मनी के चांसलर गरहर्ड श्रोडर के एक प्रवक्ता ने कहा है कि अगर रूस विश्व अर्थव्यवस्था के दायरे में बना रहना चाहता है तो उसे इस मामले में क़ानूनी आश्वासन देना होगा. जर्मनी रूस का सबसे बड़ा व्यापारिक दोस्त है और वहाँ विदेशी पूंजी निवेश का बड़ा हिस्सा जर्मनी से ही आता है. उधर रूस में इस संकट ने आर्थिक बाज़ार पर व्यापक असर डाला है. सरकारी वकीलों ने युकोस कंपनी के क़रीब आधे शेयर सील कर दिए हैं और स्टॉक बाज़ार में पिछले सप्ताह में क़रीब 15 प्रतिशत की गिरावट आई है. |
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