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इराक़ पर रिपोर्ट के लिए सीआईए को फटकार
जॉन टेनेट
जॉन टेनेट पर भी समिति की रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है

इराक़ पर हमले के लिए तैयार की गई अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की रिपोर्ट से अमरीकी संसद की एक समिति ख़ुश नहीं है.

यह समिति इस रिपोर्ट के लिए सीआईए को फटकारने जा रही है.

वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार के मुताबिक सीनेट की ख़ुफ़िया मामलों की समिति अपना ध्यान सीआईए की रिपोर्ट और उसके प्रमुख जॉन टेनेट पर केंद्रित कर रही है.

हालांकि अभी यह पता नहीं चला है कि समिति अपनी रिपोर्ट कब तक जारी करने वाली है.

अख़बार के मुताबिक़ समिति मानती है कि सीआईए ने सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मामले को बढ़ाचढ़ाकर बताया.

ख़बर है कि महाविनाश के हथियारों के सबूतों के मामले में और 'आतंकवाद' से इराक़ के संबंधों को लेकर सीआईए ने जो सबूत दिए उसे लेकर भी समिति सीआईए को लताड़ने जा रही है.

सबूत

उल्लेखनीय है कि सीआईए ने कहा था कि इराक़ महाविनाश के हथियार बना रहा है, उसके पास रासायनिक और जैविक हथियार हैं और वह परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है.

समिति के सदस्यों को सीआईए के सबूतों को लेकर आश्चर्य हुआ है.

उनका कहना है कि या तो वे विवादास्पद हैं या फिर जानकारियाँ सिर्फ़ एक ही स्रोत के हवाले से जुटाई गई है.

रिपब्लिकन सांसद सीनेटर पैट रॉबर्ट्स का कहना है कि बुश प्रशासन को ख़ुफ़िया एजेंसी ने आधी अधूरी जानकारियाँ उपलब्ध करवाईँ.

उन्होंने अख़बार से बातचीत में कहा, ''मुझे ख़ुफ़िया एजेंसियों की विश्वसनीयता को लेकर चिंता हो रही है.''

लेकिन सीआईए के प्रवक्ता बिल हार्लोव ने रिपोर्ट को सही बताया है.

उनका कहना है कि उनकी रिपोर्ट इराक़ में दस वर्षों तक महाविनाश हथियार कार्यक्रम के अध्ययन के बाद और कई सूत्रों से पुष्टि की बाद तैयार की गई थी.

उनका कहना है कि जॉन टेनेट ने तो समिति के सामने प्रस्ताव भी रखा था कि वह अगर चाहे तो ख़ुफ़िया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों से बात भी कर सकती है.

प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस बात पर आश्चर्य हो रहा है कि समिति बिना एजेंसी का स्पष्टीकरण सुने किसी नतीजे पर पहुँच गई है.

बीबीसी की अमरीकी विदेश विभाग संवाददाता जॉन लीन का कहना है कि यह अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय को विवाद से बचाकर सारा दोष ख़ुफ़िया एजेंसियों के सर पर मढ़ने की रिपब्लिकनों की कोशिश दिखती है.

शायद यही कारण है कि समिति की रिपोर्ट पर अभी भी डेमोक्रेट सदस्यों को आपत्ति है.

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