|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रंगभेद पर बनी एक फ़िल्म से हड़कंप
रंगभेद पर बनी एक फ़िल्म को लेकर ब्रिटेन में हड़कंप मचा हुआ है. इसे लेकर पाँच पुलिस अधिकारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है और तीन को निलंबित कर दिया गया है. यह डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बीबीसी ने बनाई है और इसमें दिखाया गया है कि ब्रितानी पुलिस विभाग में रंगभेद की मानसिकता वाले अधिकारी हैं. इस फ़िल्म का प्रसारण ब्रिटेन में मंगलवार को हुआ था. इसमें पुलिस अधिकारियों को रंगभेद से प्रेरित टिप्पणियाँ करते हुए और यह स्वीकार करते हुए दिखाया गया था कि उनके निर्णयों में रंगभेद हावी होता रहा है. फ़िल्म दिखाए जाने के बाद ब्रिटेन के कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने रंगभेद की मानसिकता की निंदा की है और कहा है कि ऐसी मानसिकता वाले अधिकारियों की पुलिस सेवा में कोई जगह नहीं है. इस फ़िल्म पर टिप्पणी करते हुए ब्रितानी गृह मंत्री डेविड ब्लंकेट ने कहा, ''रंगभेद की हालत भयावह है और रंगरुटों को बेहतर प्रशिक्षण दिए जाने की ज़रुरत है.'' हालांकि पहले उन्होंने बीबीसी के इस प्रयास को ग़लत बताया था. इस फ़िल्म में एक पुलिस अधिकारी को बाक़ायदा यह स्वीकारते हुए दिखाया गया कि वे रंगभेदी हैं और यह कि 'हिटलर की राय सही थी.' इस अधिकारी ने सबसे पहले इस्तीफ़ा दिया. पत्रकारिता पर भी सवाल
इसके बाद मैनचेस्टर पुलिस के प्रमुख ने भी इसे स्वीकार किया था. बीबीसी संवाददाता मार्क डैली ने पुलिस विभाग में बाक़ायदा भर्ती होकर प्रशिक्षण लेते हुए छिपे हुए कैमरे से इस फ़िल्म का निर्माण किया. उन्होंने सिपाही के रुप में मैनचेस्टर पुलिस में आठ हफ़्ते काम किया और इससे पहले पाँच महीने प्रशिक्षण में बिताए. उनके अफ़सरों को नहीं पता था कि मार्क कौन है और वास्तव में वह रंगभेद पर फ़िल्म बना रहा है. उन्होंने इस साल 27 जनवरी से काम शुरु किया था. उनका भेद खुल जाने के बाद अगस्त में उनको गिरफ़्तार कर लिया गया फिर ज़मानत पर छोड़ा गया. बीबीसी ने कहा है कि प्रशिक्षण और काम के दौरान उनको जो भी भुगतान किया गया उसे एक अलग एकाउंट में रखा गया है और उसे पुलिस विभाग को वापस लौटा दिया जाएगा. उनके इस प्रयास को 'अनैतिक पत्रकारिता' भी कहा गया. लेकिन बीबीसी ने इसे सही ठहराया है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||