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सोमवार, 13 अक्तूबर, 2003 को 05:21 GMT तक के समाचार
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दुबई में भारत-पाकिस्तान के टैक्सी ड्राइवरों का राज

दुबई में टैक्सी वालों की अच्छी कमाई है
भारतीय और पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवरों का राज है दुबई में

दुबई की लंबी चौड़ी सड़कों पर दौड़ने वाली ख़ूबसूरत टैक्सियाँ और उनके अंदर बैठने वाले चुस्त ड्राइवर दुबई की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी के सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं.

सबसे मज़े की बात ये है कि दुबई सरकार कि इस ख़ूबसूरत गाड़ियों में 80 प्रतिशत को कोई और नहीं बल्कि भारतीय मूल के वासी ही चलाते हैं.

ये मेहनती और होनहार ड्राइवर न सिर्फ़ दुबई वासियों की ज़िंदगी को आसान बनाते हैं, बल्कि अपने परिवार को भी अपनी मेहनत से सुख पहुँचाते हैं.

सावन कुमार 14 साल पहले पुणे से दुबई आए. आँखों में अच्छे भविष्य के सपने लिए.

सावन ने एक फ़र्नीचर की दुकान में नौकरी की लेकिन जब उन्हें इस काम में ज़्यादा पैसा नहीं मिला तो उन्होंने जमा पैसों से दुबई में ड्राइविंग लाइसेंस हासिल की.

बाद में वे टैक्सी चलाने लगे. अब वे 12 साल से यही काम कर रहे हैं.

सावन कुमार कहते हैं, "दुबई और उनके लोगों को शायद हम से अधिक कोई नहीं जानता. मैने दुबई की हर सुबह और शाम देखी है. जैसे एक डॉक्टर मरीज़ की नब्ज़ देखकर उसके बारे में बताता है, इसी तरह हम ड्राइवर भी सड़क का हर कोना पढ़ कर वहाँ का हाल बता देते हैं."

अच्छी शिक्षा

शहज़ाद भी 15 साल पहले दुबई आए थे. शहज़ाद का संबंध पाकिस्तान के पहाड़ी शहर क्वेटा से है.

 दुबई और उनके लोगों को शायद हम से अधिक कोई नहीं जानता. मैने दुबई की हर सुबह और शाम देखी है. जैसे एक डॉक्टर मरीज़ की नब्ज़ देखकर उसके बारे में बताता है, इसी तरह हम ड्राइवर भी सड़क का हर कोना पढ़ कर वहाँ का हाल बता देते हैं

सावन कुमार

आज वह 14 घंटे काम करके अपनी ज़िंदगी की गाड़ी आगे बढ़ा रहे हैं.

शहज़ाद कहते हैं, "ड्राइवर की ड्यूटी बड़ी सख़्त होती है मगर शायद यह इस शहर में सबसे अच्छी नौकरी है."

सावन और शहज़ाद जैसे हज़ारों टैक्सी ड्राइवर दुबई के लगातार हो रही प्रगति के भी गवाह हैं.

वे कहते हैं, "मुझे याद है कि जब मैं दस साल पहले दुबई आया था तो यहाँ दूर-दूर तक रेगिस्तान नज़र आता था. मगर आज ये शहर एक दुल्हन की तरह लगता है."

दिन भर काम करने के बाद ये टैक्सी ड्राइवर अपने ड्राइवर दोस्तों के साथ शाम बिताते हैं और अपने दुख-सुख बाँटते हैं.

अच्छी कमाई

इन लोगों में 20 वर्षीय साजिद भी हैं, जो मुंबई में अपनी पढ़ाई आधी छोड़कर दुबई में नौकरी करने आ गए.

टैक्सी ड्राइवर दुबई की ज़िंदगी का हिस्सा हैं

वे मानते हैं कि मुंबई में वे अगर टैक्सी चलाने की सोचते भी तो उनके घर वाले नाराज़ होते और इज़्ज़त की दुहाई देते.

साजिद यह भी मानते हैं कि जितने पैसे वे वहाँ दिन भर टैक्सी चला कर कमाते हैं वो शायद एक डिग्री लेकर और अच्छी से दफ़्तर में बैठकर नहीं कमा सकते.

लेकिन अपने बच्चों को लेकर साजिद के मन में भी सपने हैं.

वे कहते हैं, "मैं अपने बच्चों से यह नहीं कराऊँगा. पूरा-पूरा दिन गाड़ी चलाते-चलाते थक जाता हूँ. मगर सिर्फ़ यह सोचकर चलाता हूँ कि कल हमारे पास भी इतनी ही शानदार गाड़ी होगी."

ये टैक्सी ड्राइवर विदेशी लोगों के गाइड बनकर भी खूब पैसा बनाते हैं.

सूबा सरहद, पाकिस्तान के रहने वाले 30 वर्षीय मासिद ख़ान का कहना है कि दुबई में अधिकतर भारतीय और पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर मेहनती हैं.

ये ऐसे लोग हैं जिनको अपने मुल्क में सही पैसा न मिलने की वजह से दूसरे मुल्क में रोज़ी की तलाश में आना पड़ा.

संजय भी अपने ख़ान दोस्त की बात से सहमत हैं.

लेकिन वजह चाहे जो भी हो दुबई या संयुक्त अरब अमीरात के दूसरे शहरों में भारत और पाकिस्तान के टैक्सी ड्राइवर की राज करते हैं.

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