You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
प्रवासी मज़दूर आखिर शहरों में क्यों नहीं रुक रहे?
जब लॉकडाउन की शुरुआत हुई थी, तो अंदाज़ा भी नहीं था कि मज़दूरों के छाले ज़िंदगी की इतनी स्याह तस्वीर दिखाएंगे.
लेकिन धीरे-धीरे भयावह हालात सामने आ रहे हैं. सरकारें इनका ख्याल रखने की बात कह रही हैं लेकिन मज़दूर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर भी अपने घर जाने को तैयार हैं.
वीडियो: सलमान रावी और शुभम कौल
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)