आपको मेल चेक करने की बीमारी तो नहीं हो गई?

    • Author, एलिना डिज़िक
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

आज की डिजिटल दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो ई-मेल का इस्तेमाल नहीं करते. भले ही ये बात हैरान करने वाली हो, मगर है ये बिल्कुल सच.

बरसों से ई-मेल का इस्तेमाल कर रहे कई लोग अब इससे इस कदर उकता चुके हैं कि वो ई-मेल करते ही नहीं, या बेहद कम करते हैं.

अमरीका के कोलोराडो में रहने वाले ऑडी चैंबरलेन उनमें से एक हैं. ऑडी अब ई-मेल नहीं करते. अगर कोई उन्हें मेल करता भी है, तो, उनके मेल से ऑटोमेटेड जवाब जाता है.

सामने वाले को संदेश जाता है कि या तो वो ऑडी के साथी को मेल करें, या फिर ऑडी को टेक्स्ट मैसेज करें.

मेल

ऑडी या तो मैसेज से या फिर फ़ोन कॉल पर अपने काम निपटाते हैं. ऑडी दो फ़ोन रखते हैं.

एक से वो अपने सोशल मीडिया और तस्वीरों का काम करते हैं. दूसरे से वो मैसेज और कॉल करते हैं.

चूंकि वो मेल नहीं करते, तो ऑडी को लैपटॉप लेकर चलने की ज़रूरत नहीं. वो बहुत हल्का महसूस करते हैं. आज़ाद महसूस करते हैं.

ऑडी कहते हैं कि मुझे सोचने और दूसरे काम करने के लिए बहुत वक़्त मिल जाता है.

इससे उनके ग्राहकों को भी फ़ायदा हुआ है. क्योंकि वो मैसेज और कॉल पर तुरंत उपलब्ध होते हैं. तुरंत जवाब देते हैं.

मेल से मिला छुटकारा

हम में से बहुत से लोग ई-मेल से दूरी बनाने के सपने देखते हैं. कुछ लोगों को तो इतनी खीझ होती है कि वो मेल को बम से उड़ाने तक की सोच डालते हैं.

कई लोग कोशिश करके कुछ वक़्त के लिए मेल से दूरी भी बना लेते हैं. दिन में बार-बार के बजाय एक या दो-बार मेल चेक करते हैं.

ऐसे ही एक शख़्स हैं न्यूयॉर्क के रहने वाले मुब्स इक़बाल. इक़बाल एक वेब डेवेलपर हैं. वो ई-मेल के बजाय स्नैप, हिपचैट और फ़ेसबुक मैसेंजर जैसे चैटिंग ऐप का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं.

इनके ज़रिए वो दोस्तों और कारोबारी साथियों से जुड़े रहते हैं. ई-मेल पर उनकी निर्भरता कम हुई है.

अमरीका की कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी की ग्लोरिया मार्क, ई-मेल का इस्तेमाल छोड़ने के कई फ़ायदे बताती हैं.

ग्लोरिया कहती हैं कि इससे आपके पास दूसरे काम करने का वक़्त निकलता है. आप बातचीत के दूसरे ज़रिए भी आज़माते हैं. ग्लोरिया कहती हैं कि ई-मेल का इस्तेमाल काफ़ी तनाव देता है.

मेल का जवाब मैसेज से

न्यूयॉर्क की रहने वाली लॉरा बेलग्रे ने ई-मेल का इस्तेमाल बहुत कम कर दिया है. वो सुबह 11 बजे से पहले मेल नहीं देखतीं.

छुट्टी के दिन तो वो ई-मेल खोलती ही नहीं हैं. पहले वो रोज़ दो घंटे ई-मेल चेक करने और जवाब देने में ख़र्च करती थीं. अब लॉरा उसी वक़्त का इस्तेमाल लिखने-पढ़ने में करती हैं.

ऐसा नहीं है कि मेल की जगह मैसेज करना बहुत फ़ायदेमंद है. इसमें भी काफ़ी वक़्त जाता है. पर अच्छी बात ये है कि मैसेज में आप कम शब्द और कम वक़्त में जवाब दे पाते हैं.

न्यूयॉर्क के मुब्स इक़बाल दिन में एक बार मेल चेक करते हैं. अक्सर वो मेल का जवाब मैसेज से देते हैं.

हम सभी लोगों के पास ये विकल्प नहीं है कि हम ई-मेल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दें. हां, ये ज़रूर किया जा सकता है कि ई-मेल देखने और जवाब देने का वक़्त नियत कर दिया जाए. इससे भी आपका काफ़ी टाइम बचेगा.

ऑटोमेटेड मैसेज का सहारा

अमरीका की रहने वाली लेखिका जो पियाज़्ज़ा ऐसा ही करती हैं. उन्होंने अपने ई-मेल में ऑटमेटेड मैसेज लगा रखा है. कोई भी मेल आने पर उसका तुरंत जवाब ये जाता है कि वो इसका बाद में जवाब देंगी.

इससे पियाज़्ज़ा पर फौरी जवाब देने का दबाव कम हुआ है. ख़ाली वक़्त में वो बिना खलल के लगातार लिखने का काम कर लेती हैं.

हालांकि जब पियाज़्ज़ा ने ये सिलसिला शुरू किया था, तो, लोग मेल का जवाब न मिलने पर मैसेज करने लगते थे. मगर धीरे-धीरे लोग उनकी आदत समझ गए हैं. अब वो उन्हें तंग नहीं करते.

ऑडी चैंबरलेन कहते हैं कि जो लोग ई-मेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, उन्हें पलटवार के लिए तैयार रहना होगा. लोगों को शुरू में आपके फ़ैसले की अहमियत नहीं समझ में आएगी. वो नाराज़ होंगे. परेशान होंगे. जवाब के इंतज़ार में बेक़रार होंगे

ऑडी कहते हैं कि अगर आप उन्हें सलीक़े से अपनी बात समझाएंगे तो लोग आपके ई-मेल से दूरी बनाने के फ़ैसले का सम्मान भी करेंगे. तैयारी आपको ही करनी है.

अब ऑडी अपने पास आने वाले ई-मेल के जवाब में लोगों से अपने सहयोगी को मेल करने या मैसेज करने को कहते हैं. उनके जानने वालों को उनकी आदत समझ में आ गई है.

इसी तरह जो पियाज़्ज़ा को भी अब कम ई-मेल आते हैं.

लोग छोटा संदेश भेजते हैं और कम शब्दों में जवाब की उम्मीद भी करते हैं.

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