उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से क़रीब
एक चौथाई (95) को संवेदनशील घोषित किया गया है.
सात चरणों में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों के लिए
92,821 मतदान केंद्रों पर कुल 1,74,351 बूथ बनाए गए हैं.
पांच साल पहले के विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार
मतदान केंद्रों की संख्या में क़रीब दो फ़ीसदी का वृद्धि हुई है. वहीं पोलिंग बूथों
की संख्या में 18.45 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की गई है.
ये जानकारी राज्य के लॉ एंड ऑर्डर एडीजी प्रशांत कुमार
ने रविवार को पत्रकारों को दी.
उन्होंने बताया कि राज्य के सात ज़िलों- पीलीभीत, महाराजगंज,
सिद्धार्थनगर, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और लखीमपुर खीरी की सीमाएं नेपाल के आठ
ज़िलों से लगती है. राज्य के इन ज़िलों में कुल 14 विधानसभा क्षेत्र आते हैं.
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के 30 ज़िलों में पड़ने वाली
74 विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं देश के दूसरे नौ राज्यों से मिलती हैं.
वहीं एक अन्य अधिकारी ने बताया कि किसी विधानसभा क्षेत्र
को "संवेदनशील" घोषित करने के पीछे कई कारण होते हैं. इन कारणों में राजनीतिक
दलों के बीच कड़ी प्रतिद्वंद्विता, अपराधी तत्त्वों की मौजूदगी, सांप्रदायिक और जातिगत
तनाव, उग्रवाद आदि प्रमुख हैं.
शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के दावे
प्रशांत कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों के 275 अपराधियों और जेलों में क़ैद 869 अपराधियों की पहचान की गई है.
ये सभी अपराधी चुनाव प्रक्रिया को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीक़े से प्रभावित कर सकते हैं. पुलिस के अनुसार, ऐसे अपराधियों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है.
पुलिस के अनुसार, अवैध शराब का दुरुपयोग रोकने, जेलों में बंद अपराधियों पर नज़र रखने और सीमा पार से होने वाली गड़बड़ियों पर क़ाबू पाने के लिए राज्य पुलिस ने कई इंतज़ाम किए हैं.
पुलिस ने यह भी बताया कि राज्य के सभी थानों में चुनाव संबंधी ब्यौरों को दर्ज़ करने के लिए अलग से रजिस्टर रखा गया है.