9/11 हमले की 20वीं बरसी: 'हम नहीं भूलेंगे', दुनिया भर के नेताओं ने क्या-क्या कहा

इस मौक़े पर वो तमाम लोग भी जमा हुए हैं जिन्होंने इस हादसे में अपनो को खो दिया. उन्होंने तेज़ आवाज़ में अपनों के नाम पुकारे.

लाइव कवरेज

अनंत प्रकाश, शुभम किशोर and भूमिका राय

  1. 9/11 हमले की 20वीं बरसी: दुनिया भर के नेताओं ने क्या-क्या कहा

    9/11 हमले की याद

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    9/11 आतंकी हमले की वर्षगांठ के मौक़े पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और देश की प्रथम महिला जिल बाइडन न्यूयॉर्क शहर में 9/11 स्मारक पहुंचे.

    उनके साथ पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, बिल क्लिंटन और तमाम राष्ट्रीय और प्रांतीय नेता भी थे.

    20 साल पहले हुए आतंकी हमले की भयावहता को याद करते हुए पहले उत्तरी टावर पर हुए हमले के लिए मौन रखा गया और फिर दक्षिणी टावर पर हुए हमले को याद करते हुए.

    मौन ठीक उसी समय रखा गया जिस समय साल 2001 में हमला हुआ था. इस दौरान उन तमाम लोगों को स्मरण किया गया जिनकी इस हमले में जान चली गई थी.

    इस मौक़े पर वो तमाम लोग भी जमा हुए हैं जिन्होंने इस हादसे में अपनो को खो दिया. उन्होंने तेज़ आवाज़ में अपनों के नाम पुकारे.

    मेमोरियल

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    उप राष्ट्रपति कमला हैरिस ने सभी से एकजुटता की अपील की.

    उन्होंने कहा, “मुसीबत के समय में हमने एक दूसरे की तरफ़ देखा, हमने अजनबियों में दोस्त खोजे. ये अमेरिकियों की ताकत और एकजुटता की याद दिलाता है. ये अमेरिका में ही मुमकिन है.”

    पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने कहा कि हमले के बाद अमेरिकी लोगों की ज़िदगियां बदल गई.

    कम उम्र वालों को संबोधित करते हुए बुश ने कहा कि "हमने जिन भावनाओं का अनुभव किया है, उनका वर्णन करना कठिन है.''

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ट्वीट में लिखा: "हम कभी नहीं भूलेंगे. हम हमेशा स्वतंत्रता के लिए लड़ेंगे.

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    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 9/11 पर एक लंबा लेख लिखा.

    मॉरिसन ने लिखा, "वह दिन हर जगह के स्वतंत्र लोगों पर हमला था. यह हमारे जीवन के तरीके और उदार लोकतंत्र के मूल्यों पर हमला था."

    उन्होंने लिखा, "उस दिन हुए दर्द के बावजूद, आतंकवादी हमारे संकल्प को कुचलने और हमारे जीवन के तरीके को बदलने के अपने प्रयासों में विफल रहे. 11 सितंबर ने हमें याद दिलाया कि आजादी हमेशा नाज़ुक होती है"

  2. वीडियो: काबुल की मेकअप आर्टिस्ट का डर, कहीं तालिबान न बना ले निशाना

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  3. काबुल यूनिवर्सिटी: बुर्के में ढंकी औरतों ने तालिबान के समर्थन में की रैली, लहराए झंडे

    तालिबान

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    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के कब्ज़े के बाद से ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि तालिबान के आने से देश में एकबार फिर लैंगिक भेदभाव बढ़ेगा और महिलाओं के लिए जीवन मुश्किल हो जाएगा.

    इसे सही साबित करने वाले कई उदाहरण आये दिन तस्वीरों और वीडियो में देखने को मिलते हैं लेकिन शनिवार को काबुल विश्वविद्यालय में कुछ ऐसा हुआ जिस पर यक़ीन करना मुश्किल हो सकता है.

    एएफ़पी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, काबुल विश्वविद्यालय के व्याख्यान कक्ष में शनिवार को बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं.

    इन सभी ने नक़ाब पहन रखा था. कतार में बैठी इन महिलाओं ने कसम खाई कि वे तालिबान के लैंगिक अलगाव की नीति का प्रतिबद्धता से पालन करेंगी.

    वहां मौजूद क़रीब 300 महिलाओं ने पढ़ाई करने वाली महिलाओं के लिए सख़्त तौर पर लागू की गई पोशाक पहन रखी थी.

    वहां मौजूद वक्ता पश्चिम के ख़िलाफ़ बयान दे रहे थे और ये महिलाएं तालिबान के झंडे लहरा रही थीं.

    महिलाएं

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    यूनिवर्सिटी के पोडियम पर लहराया तालिबान का झंडा

    वहां कुछ ऐसी महिलाएं थीं जिन्होंने नीले रंग का बुर्का पहना था. ऊपर से नीचे तक बुर्के में ढकी ये महिलाएं बुर्के में आंखों के पास बनी जाली की मदद से देख पा रही थीं.

    अधिकांश ने आंखों के अलावा अधिकांश चेहरे को ढकने वाले काले नकाब पहने थे. कइयों ने तो काले दस्ताने भी पहने थे.

    तालिबान के 1996-2001 के शासन में अफ़ग़ानिस्तान में महिलाओं के अधिकार लगभग नहीं के बराबर थे लेकिन दोबारा सत्ता में वापसी करने पर तालिबान ने दावा किया है कि इस बार का शासन पहले से अलग होगा.

    तालिबान के शिक्षा प्राधिकरण ने कहा है कि इस बार, महिलाओं को विश्वविद्यालय आने की अनुमति होगी लेकिन उन्होंने लैंगिक अलगाव यानी पुरुषों से अलग बैठना होगा या फिर पुरुषों और महिलाओं की बीच में पर्दे लगे होंगे.

    महिलाओं के लिए नकाब पहनना अनिवार्य होगा.

    यूनिवर्सिटी के पोडियम पर तालिबान का झंडा लहराया गया. साथ ही वहां मौजूद वक्ताओं ने उन महिलाओं की आलोचना भी की जिन्होंने हाल के दिनों में अफ़ग़ानिस्तान में विरोध प्रदर्शन किये थे.

    इन महिला वक्ताओं ने अफ़ग़ानिस्तान की इस्लामी अमीरात की नई सरकार का भी बचाव किया. जिसने न्याय मंत्रालय द्वारा अनुमति दिए जाने तक प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया है.

    शिक्षा मंत्रालय में विदेश संबंधों के निदेशक दाउद हक्कानी ने कहा कि महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया था. उन्होंने प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी और उन्हें अनुमति दी गई थी, 'आजादी नहीं'.

  4. अफ़ग़ानिस्तान संकटः 9/11 हमले के बाद ये पाँच ज़रूरी सबक़ दुनिया ने सीखे या नहीं?

  5. बीबीसी इंडिया बोल: पिछले 20 वर्षों में आतंकवाद पर कितना नकेल कस पाई दुनिया?

  6. अफ़गानिस्तान: सड़कों पर लगीं तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के संस्थापकों की तस्वीरें

    तालिबान

    इमेज स्रोत, @SecKermani/ Twitter

    बीबीसी संवाददाता सिकंदर किरमानी ने एक ट्‌वीट कर अफ़ग़ानिस्तान के बदलते हालात के बारे में बताया है.

    उन्होंने सड़कों पर लग नए पोस्टरों की तस्वीरें ट्वीट की हैं. इनमें मुल्ला उमर और जलालुद्दीन हक्कानी की तस्वीरें लगी दिख रही हैं.

    मुल्ला उमर तालिबान के संस्थापक थे और उनके बेटे मुल्ला याकूब मौजूदा तालिबान सरकार में रक्षा मंत्री बनाए गए हैं.

    वहीं, जलालुद्दीन हक्कानी ने हक्कानी नेटवर्क बनाया था. साल 2018 उनके मौत की जानकारी दी गई थी.

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    जलालुद्दीन हक्कानी के बेटे सिराजुद्दीन हक्कानी को तालिबान सरकार में गृह मंत्री बनाया है.

    सिराजुद्दीन अमेरिकी एजेंसी एफ़बीआई के 'वांछित आतंकवादियों' की लिस्ट में है. वो हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख हैं, जिसे अमेरिका ने 'आतंकवादी संगठनों' की लिस्ट में रखा है.

    इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान से कुछ तस्वीरें सामने आई थीं जिनमें महिलाओं की फ़ोटो वाले पोस्टर पर कालिख पुती दिख रही थी.

  7. असम: सरकारी पानी के टैंक में काम करते समय तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत, दिलीप कुमार शर्मा, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

    असम के सिलचर शहर में एक निर्माणाधीन सरकारी जलाशय टैंक में काम कर रहे एक नाबालिग समेत तीन मज़दूरों की दम घुटने से मौत हो गई है.

    तीनों मज़दूर मोटर पंप के जरिए पानी बाहर निकालने के लिए जन स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभाग के 12 फीट गहरे जलाशय टैंक के अंदर उतरे थे. यह घटना शुक्रवार शाम करीब तीन बजे की है.

    जन स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभाग के एक अधिकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में पानी के टैंक के अंदर गैस की मौजूदगी का पता चला है.

    यह एक पुराना टैंक है और इसका पुनर्निर्माण कार्य एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन एजेंसी को आउटसोर्स किया गया था.

    घटना से जुड़ी जानकारी के अनुसार पहले सलीम उद्दीन लस्कर नामक एक मजदूर टैंक के अंदर उतरा था और डीजल जनरेटर द्वारा संचालित मोटर पंप को चालू कर दिया.

    लेकिन जनरेटर से निकलने वाले धुएं की निकासी के लिए वहां किसी तरह का वेंटिलेशन नहीं होने के कारण मज़दूर का दम घुटने लगा और वह अंदर ही बेहोश हो गया.

    इसके बाद नाज़िम उद्दीन मज़ुमदार नामक दूसरा मज़दूर अपने साथी को देखने टैंक में उतरा लेकिन वह भी वापस नहीं आया. आखिर में 16 वर्षीय समसुल अलोम मजु़मदार जलाशय के अंदर गया.

    घटना की जानकारी मिलने के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने बेहोशी की हालत में टैंक के अंदर से दो मज़दूरों को बाहर निकाला और पुलिस तथा आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सूचित किया.

    लेकिन सलीम उद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बाकी दोनों मज़दूरों को सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने दोपहर बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया.

    तोपखाना गांव पंचायत के अध्यक्ष मियाँ ख़ान ने तीनों मज़दूरों की मौत के लिए ठेकेदारों की लापरवाही बताई है.

    उन्होंने मीडिया से कहा, ''मज़दूरों को जलाशय में प्रवेश करने और उससे बाहर निकलने के लिए सीढ़ी तक नहीं दी गई. ये गरीब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करे थे. तीन लोगों की जान बचाई जा सकती थी लेकिन गरीबों की परवाह किसे है? फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है.''

  8. LIVE: गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के इस्तीफ़े पर क्या है लोगों की राय?

  9. विवेचना: 9/11 हमलों को अंजाम देने वाले मोहम्मद अता की कहानी

  10. तालिबान के क़ब्ज़े के बाद पाकिस्तान से अफ़गानिस्तान के लिए फिर शुरू होगी विमान सेवा

    विमान सेवा

    पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस ने अगले सप्ताह इस्लामाबाद से काबुल के लिए लिए उड़ानें फिर से शुरू करने की घोषणा की है.

    एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने शनिवार को एएफ़पी को बताया कि पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से यह पहली विदेशी वाणिज्यिक सेवा है, जो शुरू होने जा रही है.

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    पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्ला हफ़ीज़ ख़ान ने कहा, "हमें उड़ान संचालन के लिए सभी तकनीकी मंज़ूरी मिल गई है.हमारा पहला वाणिज्यिक विमान13 सितंबर को इस्लामाबाद से काबुल के लिए रवाना होगा.''

    पीआईए के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को इस ख़बर की पुष्टि की है.

  11. 'तालिबान लोगों को पंजशीर छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है'

    अफ़गानिस्तान

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    पंजशीर के एक निवासी ने बीबीसी फ़ारसी सेवा को बताया है कि तालिबान ने उनके परिवारों से कहा कि उन्हें पंजशीर के अलग-अलग इलाकों से ‘अपने घर को छोड़कर काबुल जाना होगा.’

    उन्होंने कहा कि तालिबान पंजशीर के लोगों पर दबाव डाल रहा है और उन्हें वहाँ से भागने के लिए मजबूर कर रहा है.

    सोशल मीडिया पर लोगों के प्रांत छोड़कर जाने से जुड़े कई वीडिया वायरल हो रहे हैं. एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कि पंजशीर घाटी में कई कारें, बस और ट्रक खड़े हैं

    एक और निवासी ने बताया कि “कई परिवार जिन्हें ज़बरदस्ती काबुल भेजा गया था, उन्हें हिरासत में लेकर किसी अंजान जगह पर भेज दिया गया.”

    विद्रोही गुट नेशनल रेज़िस्टेंस फ्रंट के विदेशी संबंधों के इंचार्ज अली निज़ारी ने एक वीडियो जारी कर कहा कि लोगों को पंजशीर में उनके घरों से निकाला गया है.

    उनके मुताबिक़, “तालिबान नरसंहार कर रहा है, दुनिया देख रही है और उनपर असर नहीं हो रहा.”

    उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के “इन युद्ध अपराधों को रोकने” की अपील की.

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  12. आयकर विभाग के 'सर्वे' पर न्यूज़लॉन्ड्री वेबसाइट ने कहा, ‘हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं’

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    समाचार वेबसाइट न्यूज़लॉन्ड्री ने शनिवार को कहा है कि उन्होंने सब कुछ ईमानदारी से किया है और वह दफ़्तर का 'सर्वे' करने आई आयकर विभाग की टीम का सहयोग करेगी.

    संस्था के सह-संस्थापक अभिनंदन सेखरी ने शनिवार को ट्वीट करते हुए लिखा है, “हमारे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और हमने सब कुछ क़ानून के मुताबिक़ किया है. हम किसी भी कानून के अनुपालन में चूके नहीं हैं और किसी भी क़ानून का उल्लंघन नहीं किया है. हम अपना व्यवसाय ईमानदारी और निष्ठा के साथ करते हैं."

    न्यूज़लॉन्ड्री ने अपनी वेबसाइट पर भी सेखरी के हवाले से अपना पक्ष प्रकाशित किया है जिसमें लिखा गया है –

    "10 सितंबर की दोपहर 12:15 बजे आयकर विभाग की एक टीम न्यूज़लॉन्ड्री के हमारे मुख्य दफ्तर पहुंची. मुझे दिखाए गए काग़ज़ात के अनुसार वो धारा 133 ए के तहत "सर्वे" करने आए थे. यह टीम परिसर से 11 सितंबर को रात के 12:40 बजे के आस-पास गई.

    मुझे कहा गया कि मैं अपने वकील से बात नहीं कर सकता और मुझे अपना फोन उन्हें देना होगा. टीम में करीब छह या सात लोग थे और सभी का व्यवहार विनम्र और पेशेवर रहा. मुझे बताया गया कि कानून के अनुसार मुझे बिना कानूनी सलाह लिए उनका सहयोग करना होगा.

    उन्होंने हमारे दफ्तर में मौजूद सभी कंप्यूटर उपकरणों को देखा और खंगाला. मेरा मोबाइल, लैपटॉप और ऑफिस की कुछ मशीनों को अपने अधिकार में ले कर आईटी टीम के द्वारा उसमें मौजूद सारा डाटा डाउनलोड कर लिया गया. जहां तक मैं जानता हूं इससे (मेरे व्यक्तिगत लैपटॉप और मोबाइल फोन से डाटा लेने से) मेरे निजता के मौलिक अधिकार का हनन होता है.

    आयकर विभाग की टीम का मेरे दफ्तर में दूसरी बार आना हुआ है. पहली बार ऐसा जून में हुआ था. हमने तब भी उनका पूरा सहयोग किया था.

    हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है और हमने सब कुछ नियमानुसार किया है. हम किसी भी कानून का उल्लंघन या अतिक्रमण नहीं कर रहे. हम अपना काम पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करते हैं. हमने पूर्व में भी आयकर अधिकारियों को हमारी फंडिंग और खातों से संबंधित सभी काग़ज़ात दे दिए थे.”

    बता दें कि आईटी डिपार्टमेंट ने इसके साथ ही न्यूज़क्लिक नामक एक अन्य वेबसाइट के दफ़्तर पर भी छापा मारा था.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, आयकर विभाग के अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा है कि दो न्यूज़ पोर्टल के दफ़्तरों पर टैक्स भुगतान से जुड़ी जानकारियों के सत्यापन के लिए दो सर्वेक्षण अभियान चलाए गए थे.

  13. ब्रेकिंग न्यूज़, करनाल में किसानों ने हफ़्ते भर से जारी धरना ख़त्म करने की घोषणा की

    किसान नेता

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    किसान नेताओं ने शनिवार को करनाल के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक प्रेस वार्ता करते हुए ऐलान किया है कि करनाल, मिनी सचिवालय के पास जारी धरना ख़त्म कर दिया जाएगा.

    बता दें कि किसान नेता बीते कुछ दिनों से किसानों के साथ निर्ममता से पेश आने का आदेश देने वाले करनाल के पूर्व एसडीएम आयुष सिन्हा पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे.

    हरियाणा सरकार ने इस मामले में आयुष सिन्हा का ट्रांसफर कर दिया था. लेकिन किसान लगातार इस मामले की जांच करवाए जाने की मांग कर रहे थे.

    इन मांगों को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच में तनातनी बनी हुई थी. और इस समस्या का हल निकालने के लिए दोनों पक्षों के बीच बैठकें हो रही थीं.

    क्या मांगें मानी गईं

    इस प्रेस वार्ता में बताया गया है कि 28 अगस्त को बस्तर टोल प्लाज़ा पर हुई घटना की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा कराई जाएगी और एक माह के भीतर जांच पूरी कर ली जाएगी. इस दौरान सिन्हा छुट्टी पर रहेंगे.

    इसके साथ ही मृतक सुशील काजल के परिवार के सदस्य को एक महीने के भीतर डीसी रेट पर नौकरी दी जाएगी.

    पत्रकारों के सवालों पर अपने बयान की सफाई देते एसडीएम आयुष सिन्हा

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    क्या है पूरा मामला?

    हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर बीती 28 अगस्त को बीजेपी नेताओं की एक बैठक में हिस्सा लेने आने वाले थे. और किसान नेता सीएम खट्टर का घेराव करने की कोशिश कर रहे थे.

    इस कोशिश में किसान नेताओं ने भारी संख्या में करनाल हाइवे पर जाम लगाया. इसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया.

    इस घटना में सुशील काजल नामक किसान की मौत हो गयी. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई में काजल की मौत नहीं हुई.

    इस घटना के साथ ही करनाल के एसडीएम आयुष सिन्हा का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह किसानों के साथ निर्ममता से पेश आने का आदेश देते हुए दिख रहे थे.

    हालांकि, सिन्हा ने सफाई देते हुए कहा था कि पत्थरबाज़ी शुरू हो गयी थी और उन्होंने उचित रूप से बल प्रयोग करने का आदेश दिया था.

    लेकिन इस वीडियो में सिन्हा कहते दिख रहे थे कि “उठा-उठा के मारना पीछे सबको. हमें किसी भी हालत में ये नाका टूटने नहीं देना है. हमारे पास पर्याप्त फोर्स है. हम दो दिन से सोए नहीं हैं. लेकिन आपको थोड़ी नींद लेने के बाद यहां आना है. मेरे पास एक भी बंदा निकल कर नहीं आना चाहिए. अगर आए तो सर फूटा हुआ होना चाहिए उसका, क्लियर है आपको.”

    सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखने के बाद कई पूर्व एवं मौजूदा अधिकारियों ने संबंधित अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी.

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    इसके साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं और संयुक्त किसान मोर्चा ने आयुष सिन्हा के इस्तीफे की मांग उठाई है.

    हालांकि, सरकार इस मामले में अधिकारी का बचाव करते हुए दिख रही थी.

    हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने सिन्हा का बचाव करते हुए कहा था कि अधिकारी को शब्दों का चुनाव सही ढंग से नहीं किया गया.

    हालांकि, उन्होंने पुलिस द्वारा की गयी कार्रवाई का बचाव किया था.

    पुलिसकर्मी

    इमेज स्रोत, BBC/Kamal Saini

    लगभग इसी तरह स्थानीय डीएम निशांत यादव ने भी सिन्हा का बचाव किया था.

    उन्होंने कहा था, “कुछ शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था. करनाल प्रशासन के प्रमुख होने के नाते मैं अपना खेद व्यक्त करता हूं. लेकिन एसडीएम एक अच्छे अधिकारी हैं. उन्होंने उस मौके पर गरमा-गरमी भरे हालात में कुछ शब्दों का इस्तेमाल किया जो कि उन्हें नहीं करना चाहिए था. लेकिन उनका इरादा ग़लत नहीं था.”

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  14. कोरोना संक्रमण के 33 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए

    वैक्सीन लगवाती एक महिला

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    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार सुबह बताया है कि बीते 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 33,376 मामले सामने आए हैं.

    इसके साथ ही 32,193 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक हुए हैं. वहीं, पिछले 24 घंटों में 308 लोगों की कोरोना से संघर्ष करते हुए मौत हो गयी है.

    इसके साथ ही पिछले 24 घंटों में 65,27,175 टीके लगाए गए हैं.

    इस तरह 11 सितंबर 2021 को भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के आंकड़े इस प्रकार हैं -

    • कुल मामले - 3,32,08,330
    • सक्रिय मामले - 3,91,516
    • ठीक हुए लोगों की संख्या - 3,23,74,497
    • कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या - 4,42,317
    • अब तक लगाए गए टीकों की संख्या - 73,05,89,688
    कोरोना अपडेट
  15. तुर्की ने तालिबान को महिलाओं के मुद्दे पर क्या सलाह दी

    महिलाएं

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    तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बीते शुक्रवार एक बयान जारी करके अफ़ग़ानिस्तान की अंतरिम सरकार को महिला अधिकारों के मुद्दे पर एक अहम सलाह दी है.

    तुर्की के साथ-साथ मेक्सिको, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ी से बदलती स्थितियों के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है.

    इस बयान में हामिद करज़ई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए आतंकी हमले की निंदा की गयी है और हमले में मारे गए अफ़ग़ानी, अमेरिकी और ब्रितानी लोगों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की गयी.

    महिलाएं

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    इस साझा बयान में तालिबान से कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं की सहभागिता, उनके अधिकारों की सुरक्षा आश्वस्त की जानी चाहिए.

    बता दें कि अफ़ग़ानिस्तान की अंतरिम सरकार के मंत्रिमंडल में महिलाओं की मौजूदगी नहीं है. और तालिबान ने बार-बार कहा है कि सरकार में महिलाएं मंत्री पद पर मौजूद नहीं होंगी.

    इसके साथ ही हैरात से लेकर काबुल तक महिलाओं के बुरके में नज़र आने की ख़बरें आ रही हैं.

    इस सबके बीच तुर्की ने इन तमाम देशों के साथ तालिबान से आग्रह किया है कि पिछले सालों में अफ़ग़ानिस्तान की महिलाओं ने जो प्रगति की है, उसे संरक्षित किया जाए.

  16. 9/11 की पूर्व संध्या पर बोले बाइडन- एकता रही है सबसे बड़ी अमेरिकी ताक़त

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन

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    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने 9/11 हमले की पूर्व संध्या पर एक वीडियो जारी करके इस हमले में मारे गए 2,977 लोगों को श्रद्धांजलि दी है.

    इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी जनता से एकजुट रहने का आग्रह किया है.

    हमले के बाद बचाव अभियान में भाग लेने वाले आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के बारे में बात करते हुए बाइडन ने कहा, “हम उन सभी लोगों का सम्मान करते हैं जिन्होंने (हमले के) मिनटों, घंटों, महीनों और सालों बाद अपनी जान जोख़िम में डाली और अपनी जान दी.”

    अमेरिका में इस हमले की याद में अलग-अलग जगहों पर शनिवार को श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जाएंगी.

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    बाइडन ने कहा, “चाहें कितना भी समय बीत गया हो, ये मौके बेहद कष्ट के साथ वो सारी यादें वापस ले आते हैं, जैसे कि आपको अभी कुछ लम्हों पहले ये ख़बर मिली हो.”

    हमले के बाद अमेरिकी मुसलमानों के साथ होने वाले व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि “हमने एक शांति प्रिय धर्म के सच्चे और वफादार अनुयायियों अमेरिकी मुसलमानों के ख़िलाफ़ मानवीय स्वभाव के स्याह पक्षों – डर, गुस्सा, आक्रोश एवं हिंसा होते हुए भी देखा है.”

    लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि अमेरिका की सबसे बड़ी ताक़त एकता रही है.

    उन्होंने कहा है कि “हमने एक चीज़ सीखी है कि एकता एक ऐसी चीज़ है जो कभी नहीं टूटनी चाहिए.”

  17. तालिबान ने अमरुल्लाह सालेह के भाई को मारा, परिवार ने दी सूचना

    अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह की तस्वीर को लगाते हुए दुशांबे स्थित अफ़ग़ानिस्तान दूतावास के कर्मचारी

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    अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह के परिवार ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को सूचना दी है कि तालिबान ने सालेह के भाई रोहुल्ला अज़ीज़ी की हत्या कर दी है.

    सालेह के भतीजे ने रॉयटर्स को एक टेक्स्ट मैसेज़ भेजकर ये सूचना दी है.

    उन्होंने लिखा है कि “उन्होंने कल उनकी हत्या कर दी है और हमें उन्हें दफ़नाने नहीं दे रहे हैं. वे कह रहे हैं कि उनका शव सड़ना चाहिए.”

    तालिबान सूचना सेवा के उर्दू भाषा अकाउंट में बताया गया है कि ख़बरों के मुताबिक़, पंजशीर में संघर्ष के दौरान रोहुल्ला सालेह मारे गए हैं.

    पश्चिमी देशों के समर्थन वाली अफ़ग़ानिस्तान की सरकार में राष्ट्रीय सूचना निदेशालय के प्रमुख रह चुके अमरुल्लाह सालेह के बारे में अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है.

    अफ़ग़ानिस्तान की नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट, जिसमें स्थानीय नेता अहमद मसूद के समर्थक शामिल हैं, उन्होंने पंजशीर की राजधानी बज़ारक में हार के बावजूद तालिबान के ख़िलाफ़ संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है.

  18. नमस्कार!

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