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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने को लेकर MI5 प्रमुख ने कहा- जिस तरह तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा किया, उससे ब्रिटेन में भी चरमपंथियों को "मज़बूती मिल सकती है".
मोहम्मद शाहिद, शुभम किशोर and कमलेश मठेनी
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ब्रितानी सरकार की सुरक्षा एजेंसी MI5 के प्रमुख केन मैक्कलम ने कहा है कि बीते चार सालों में देश में आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने की 31 लेट-स्टेज साजिशों (हमला होने के अंतिम क्षणों में) को बेनकाब किया गया है.
बीबीसी संवाददाता लॉरेन टर्नर के अनुसार MI5 के महानिदेशक केन मैक्कलम ने कहा कि महामारी के दौरान देश पर हमला करने की छह साजिशों का पता लगा कर उन्हें नाकाम किया गया.
इससे पहले बीते साल अक्तूबर में उन्होंने कहा था कि साल 2017 के बाद से देश पर आतंकवाद की 27 योजनाओं को नाकाम किया गया है.
उन्होंने चेतावनी दी कि इनमें से अधिकतर इस्लामी चरमपंथियों की बनाई योजनाएं थी लेकिन कई साजिशें ऐसी भी थीं जो 'दक्षिणपंथ से जुड़े चरमपंथियों' द्वारा बनाई गई थीं.
अमेरिका पर हुए 9/11 हमलों की 20वीं बरसी के मौक़े पर वो बीबीसी के रेडियो फ़ोर कार्यक्रम में शामिल हुए थे.
कार्यक्रम में उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के बारे में कहा कि जिस तरह तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा किया, उससे ब्रिटेन में भी चरमपंथियों को भी "मज़बूती मिल सकती है".
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि आतंकवाद का ख़तरा रातोंरात नहीं बन जाएगा लेकिन लेकिन इससे चरमपंथियों का "मनोबल" बढ़ सकता है.
एक ओर जहां सरकार का कहना है कि वो तालिबान हुक़ूमत को उसके काम से आंकेगी, वहीं ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि वो आने वाले वक्त में और अधिक बढ़ते ख़तरे को ध्यान में रखकर अपनी योजनाएं बनाएगी.
मैक्कलम ने कहा कि हो सकता है कि देश पर चरमपंथी हमले बढ़ें. MI5 इस तरह के हमलों को वक्त से पहले रोकने की पूरी कोशिश करती है लेकिन चिंता की बात ये है कि "हर बार ऐसा हो सकेगा ये ज़रूरी नहीं."
उन्होंने कहा कि "एजेंसी ने बीते 20 सालों में हज़ारों लोगों की जान बचाई है लेकिन ये हमेशा सफल होगी ऐसा नहीं है."
उन्होंने कहा कि एजेंसी के सामने अब तक चरमपंथ की छोटी-मोटी साजिशें सामने आई हैं जो देश के भीतर बनी थीं, "लेकिन अफ़ग़ानिस्तान में जो हुआ उससे कुछ चरमपंथियों का मनोबल बढ़ा होगा और अब हम दूसरे ख़तरों के साथ-साथ इस तरह के ख़तरों से मुक़ाबला करने की तैयारी कर रहे हैं."
उन्होंने चेतावनी दी कि अल-क़ायदा जैसे चरमपंथी समूह हमले की बड़ी साजिशें बना सकते हैं और एक चिंता यह भी है कि चरमपंथी हमले की पहले से कहीं बेहतर योजनाएं बना सकते हैं.
मैक्कलम ने कहा कि "अफ़ग़ानिस्तान में जो हुआ उसने कई चरमपंथियों को प्रेरित किया होगा, इससे उनके एक बार फिर पुर्नगठित होने की आशंका बढ़ जाती है और 9/11 की तरह सुनियोजित और बड़े पैमाने पर होने वाले हमलों का ख़तरा भी."

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तालिबान और चरमपंथ के बीच संबंध को लेकर यूएन भी चिंतित
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने सत्ता संभाल ली है. तालिबान के शासन को लेकर अभी कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा रहा है लेकिन दुनिया के कई देशों ने इसे लेकर आशंका ज़ाहिर की है.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटरेश ने भी अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के शासन और चरमपंथ के बीच संबंध को लेकर चिंता ज़ाहिर की है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी को दिए एक इंटरव्यू में उनसे पश्चिमी अफ्रीका के साहेल इलाक़े में में अफ़गानिस्तान जैसे ख़तरों के बारे में पूछा गया, जहां इस्लामी समूह विद्रोह कर रहे हैं.
गुटरेश मे कहा कि इस बात का "ख़तरा" है कि "कुछ आंतकी समूह, जो हुआ है उससे प्रेरणा लेकर वो कर सकते हैं जिसके बारे में कुछ महीनों पहले तरक उन्होंने सोचा भी नहीं था."
उन्होंने कहा कि वह उन कट्टर समूहों के बारे में चिंतित हैं जहां मौत की "कामना की जाती" है, और कहा कि "साहेल में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए आवश्यक" है.

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रूसी सरकार के प्रवक्ता दिमित्रि पेस्कोव ने कहा है कि रूस “किसी भी तरह” से तालिबान सरकार के उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं लेगा.
उनके मुताबिक, “हमें नहीं पता कि हालात कैसे बदलेंगे. इसलिए हम कह रहे हैं कि हमारे लिए ये समझना ज़रूरी है तालिबान के नेतृत्व में अफ़ग़ान सरकार का पहला और उसके बाद आगे का कदम क्या होगा.”
आरआईए समाचार एजेंसी के मुताबिक़ हफ़्ते की शुरुआत में रूस के ऊपरी सदन के स्पीकर ने कहा था कि रुस समारोह में राजदूत स्तर के अधिकारी को भेजेगा.
गुरुवार को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि रूस अफ़ग़ानिस्तान से दूसरे देशों के सदस्यों को बाहर निकालने के लिए तालिबान से बात कर रहा है.
उन्होंने मॉस्को में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “कई देश हमसे अपने नागरिकों और अफ़ग़ान नागरिकों को वहां से बाहर निकालने के लिए कह रहे है. हम इसे छिप कर नहीं कर रहे, हम कई कैटेगरी के लोगों के लिए तालिबान से बात कर ये काम कर रहे हैं.”

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान के प्रति "नया सकारात्मक दृष्टिकोण" अपनाने का आग्रह किया.
साथ ही उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को अलग-थलग करने से अफ़ग़ान लोगों, इस इलाक़े और दुनिया के लिए "गंभीर परिणाम" होंगे.
क़ुरैशी ने यह टिप्पणी स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान की.
मैनुअल अफ़ग़ानिस्तान की ताज़ा स्थिति पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचे थे.
क़ुरैशी ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान को अलग-थलग करने के गंभीर परिणाम होंगे और यह अफ़ग़ान लोगों, क्षेत्र और दुनिया के लिए सही नहीं होगा." उन्होंने कहा कि धमकी और दबाव की नीति काम नहीं आएगी.
उन्होंने कहा, "हमें अफ़ग़ानिस्तान से संबंध को लेकर एक नया सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा."
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उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान में नई वास्तविकता को पहचानने और शांति के लिए तालिबान के साथ बातचीत करने का आग्रह किया.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति में सुधार के लिए योगदान दे रहा है और नौ सितंबर को भोजन और दवा की आपूर्ति के साथ एक विमान भेजा गया था.
पाकिस्तान ने हवाई और सड़क मार्गों से अधिक मानवीय सहायता देने का वादा किया है.
क़ुरैशी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफ़ग़ानिस्तान के आर्थिक पतन को रोकने के लिए संसाधन उपलब्ध कराने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही.
उन्होंने सुझाव दिया कि अफ़ग़ानिस्तान के फंड को फ्रीज़ करने के निर्णय से मदद नहीं मिलेगी और इस पर फिर से विचार किया जाना चाहिए.
स्पेन के विदेश मंत्री ने अफ़ग़ान लोगों की मदद के लिए पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा ज़ाहिर की.

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भबानीपुर सीट से बीजेपी की उम्मीदवार प्रियंका टिबरीवाल ने कहा है कि उनका उपचुनाव का नारा ‘भबानीपुर को चाहिए अपनी बेटी’ होगा.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि ममता बनर्जी यहाँ पैदा नहीं हुई हैं बल्कि वो ख़ुद यहाँ पर पैदा हुई हैं.
उन्होंने कहा, “मेरे ख़िलाफ़ जो उम्मीदवार (ममता बनर्जी) हैं वो एक चुनाव हार चुकी हैं, इसी वजह से भबानीपुर में उपचुनाव हो रहा है. वे (टीएमसी) पहले ही भबानीपुर जीत चुके थे लेकिन उन्हें लोकतंत्र की चिंता नहीं है या लोग क्या कहते हैं इसकी चिंता नहीं है.”
“टीएमसी के किसी उम्मीदवार को जनता ने अपना मत दिया था लेकिन ममता बनर्जी ने तय किया कि वो यहां से लड़ेंगी. यहां पर लोकतंत्र का ऐसा हाल है. ये लोगों के विचारों और वोटों का कोई सम्मान नहीं करते हैं.”

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अफगानिस्तान की स्थिति को "बहुत नाज़ुक" बताते हुए भारत ने कहा है कि यह महत्वपूर्ण है कि तालिबान ‘आतंकवाद’ के लिए अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन के उपयोग की अनुमति नहीं देने की अपनी प्रतिबद्धता का पालन करे.
भारत ने कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत सूचीबद्ध आतंकी समूह, जिसमें पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए- मोहम्मद शामिल हैं, उन्हें अफ़ग़ानिस्तान से मदद नहीं मिलनी चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने गुरुवार को अफ़ग़ानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बहस में कहा कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में "इस बात को रेखांकित किया गया है कि अफ़ग़ान क्षेत्र का उपयोग किसी भी देश को धमकाने या हमला करने या आतंकवादियों को शरण देने या प्रशिक्षित करने के लिए या आतंकवाद से जुड़ी योजना बनाने या आर्थिक मदद करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.”
“जैसा कि पिछले महीने काबुल हवाई अड्डे पर हुए निंदनीय आतंकवादी हमले से देखा गया था, आतंकवाद अफ़ग़ानिस्तान के लिए एक गंभीर ख़तरा बना हुआ है. इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि इस संबंध में की गई प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया जाए और उनका पालन किया जाए."
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भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पक्षपातपूर्ण हितों से ऊपर उठने और देश में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के साथ खड़े होने का भी आह्वान किया.
तिरुमूर्ति ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति बहुत नाज़ुक बनी हुई है. पड़ोसी और लोगों के मित्र के रूप में, वर्तमान स्थिति हमारे लिए सीधे चिंता का विषय है."
"उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान लोगों के भविष्य के साथ-साथ पिछले दो दशकों में हासिल की गई उपलब्धियों को बनाए रखने को लेकर बहुत अनिश्चितताएं हैं."
"इस संदर्भ में, हम अफ़ग़ान महिलाओं की आवाज़ सुनने, अफ़ग़ान बच्चों की आकांक्षाओं पूरा करने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता को दोहराते हैं. हम तत्काल मानवीय सहायता प्रदान करने का आह्वान करते हैं और इस बात पर ज़ोर देते हैं कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियों को वहां बिना बाधा के पहुंचने दिया जाए.”

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पूर्व सरकार की ओर से तैनात संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय संगठन से तालिबान पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.
संयुक्त राष्ट्र में अफ़ग़ानिस्तान के प्रतिनिधि ग़ुलाम इसाकज़ई ने गुरुवार को मांग की है कि तालिबान को मान्यता न दी जाए और अंतरिम कैबिनेट में शामिल नेताओं पर अंतरराष्ट्रीय यात्रा समेत संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लागू किए जाएं.
उन्होंने गुरुवार को सुरक्षा परिषद के सत्र में कहा कि हाल ही में सड़कों पर हुए प्रदर्शन ‘तालिबान के लिए कड़ा संदेश हैं कि सभी पृष्ठभूमि के अफ़ग़ान उन पर लागू अधिनायकवादी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेंगे.’
“इसलिए मैं आपसे अफ़ग़ानिस्तान में तब तक किसी भी सरकार को मान्यता देने से रोकने की माँग करता हूँ जब तक कि सच्चे अर्थों में लोगों की स्वतंत्र इच्छा की बुनियाद पर एक समावेशी सरकार का गठन नहीं होता है.”
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेश ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तालिबान के साथ संवाद बनाना होगा.
तालिबान ख़ुद की मान्यता और आर्थिक समर्थन चाहता है और अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को हटाना चाहता है.

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पंजशीर के कुछ निवासियों का कहना है कि अगर पंजशीर की तरफ़ जाने वाली सड़कें नहीं खोली गईं तो प्रांत के लोग भूखे मरेंगे.
अफ़ग़ानिस्तान के समाचार चैनल टोलो न्यूज़ के मुताबिक़, कुछ परिवार जो पंजशीर से काबुल भागकर आए हैं उनका कहना है कि प्रांत में टेली कॉम्युनिकेशन, बिजली और सड़कें बंद हैं.
एक परिवार जिसका नौजवान बेटा पंजशीर की लड़ाई में मारा गया था, उनका कहना है कि वहां मानवाधिकार के हालात बेहद ख़राब हैं.
प्रभावित परिवार की शाइस्ता मेहरबान ने बताया कि लड़ाई इस क़दर बढ़ गई है कि लोग पहाड़ों पर जाकर रहने को मजबूर हो गए हैं.

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इसके साथ ही पूर्व जिहादी नेता अब्दुल रसूल सयाफ़ ने लोगों और उनकी संपत्ति को सुरक्षित रखने की मांग की है.
सयाफ़ का कहना है कि पंजशीर में लड़ाई फ़ौरी तौर पर रुकनी चाहिए.
दूसरी ओर तालिबान का कहना है कि पंजशीर की लड़ाई में किसी नागरिक को नुक़सान नहीं पहुंचा है.
तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के सदस्य इनामुल्लाह समंगानी ने कहा है कि पंजशीर में हालात अब नॉर्मल हैं.
समंगानी का कहना है कि ‘पंजशीर में हालात नॉर्मल हैं. ये इलाक़ा अब मुजाहिदीन के नियंत्रण में है और बहुत से लोगों को मारने और निशाना बनाने वाली ख़बरें सिर्फ़ अफ़वाहें हैं.’

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इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड और बीसीसीआई ने जानकारी दी है कि भारत और इंग्लैंड के बीच मैन्चेस्टर में होने वाले पाँचवे टेस्ट मैच को रद्द कर दिया गया है.
पहले ईसीबी ने एक बयान जारी कर रहा था कि भारत 'टीम उतारने में सक्षम नहीं हैं’ और भारत ने 'मैच गंवा दिया' है.
हालांकि ईसीबी ने थोड़ी देर बाद एक नया बयान जारी कर भारत के मैच गंवाने वाले हिस्से को हटा दिया.
नए बयान में कहा गया, “बीसीसीआई से बात करने के बाद हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि पाँचवां टेस्ट जो आज शुरू होना था, उसे रद्द कर दिया गया है. कैंप में कोविड मामलों के बढ़ने के डर से, भारत टीम नहीं उतार पाया.”
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सिरीज़ में अब तक चार मैच खेले जा चुके हैं और भारत सीरिज़ में 2-1 से आगे हैं.
बीसीसीआई ने बयान जारी कर कहा कि ईसीबी से मैच कराने के तमाम तरीकों को लेकर चर्चा की गई लेकिन कोविड-19 के मामलों को देखते हुए मैच रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
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बयान में कहा गया, “बीसीसीआई और ईसीबी के बीच मज़बूत रिश्तों को देखते हुए, बीसीसीआई ने रद्द हुए मैच को फिर से कराने की पेशकश की है. दोनों देश इस मैच के लिए समय निकालने पर चर्चा करेंगे.”

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पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय ने आदेश जारी कर कहा है कि अगर 15 सितंबर तक सरकारी कर्मचारियों ने बिना किसी स्वास्थ्य कारण के कोविड-19 वैक्सीन की पहली ख़ुराक भी नहीं ली होगी तो उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज दिया जाएगा.
इसके साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि आगामी त्योहार सीज़न को देखते हुए कोविड प्रतिबंधों को 30 सितंबर तक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बढ़ा दिया है.
इन प्रतिबंधों में राजनीतिक और अन्य कार्यक्रमों में 300 लोगों की सीमा के साथ-साथ सोशल डिस्टेंसिंग और अनिवार्य रूप से मास्क पहनने जैसे प्रतिबंध शामिल हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भबानीपुर सीट से अपना नामांकन दाख़िल किया
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30 सितंबर को पश्चिम बंगाल की तीन सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिनमें से एक सीट पर ममता बनर्जी उम्मीदवार हैं.
बीजेपी ने उनके ख़िलाफ़ प्रियंका टिबरीवाल को उम्मीदवार बनाया है जबकि सीपीएम की ओर से श्रीजिब बिस्वास उम्मीदवार हैं. वहीं कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार न उतारने की घोषणा की है.
भबानीपुर के अलावाजांगीपुर और समसेरगंज विधानसभा सीटों पर भी उपचुनाव होने हैं, जिनका परिणाम 3 अक्तूबर को आएगा.

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी मे जम्मू में हिंदू देवियों का उदाहरण देते हुए कहा कि बीजेपी के कारण ‘दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की शक्तियां घटी हैं.'
कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था,टूरिज़्म और व्यापार को चोट पहुंची है.
बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “हिन्दुस्तान में नोटबंदी और GST से माँ लक्ष्मी जी की शक्ति घटी है या बढ़ी है? किसानों के बनाए गए तीन काले क़ानूनों से दुर्गा माँ की शक्ति घटी है या बढ़ी है?”
“जब हिन्दुस्तान के हर संस्थान में, कॉलेज और स्कूल में आरएसएस का व्यक्ति बिठाया जाता है तो सरस्वती माँ की शक्ति घटती है या बढ़ती है? जवाब है- घटती है.”
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में ये सभी शक्तियां बढ़ी थीं.
उन्होंने कहा, “दूसरी तरफ, जब कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा लागू किया, जब कांग्रेस पार्टी ने हिन्दुस्तान को 9% जीडीपी ग्रोथ दी तो माँ लक्ष्मी, माँ दुर्गा और माँ सरस्वती की शक्ति घटी है या बढ़ी है? जवाब है - बढ़ी हैं.”
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जो अपने आप को हिंदू कहते हैं, वो इन शक्तियों का अपमान करते हैं. "आपके साथ क्या किया, आपके बीच जो भाईचारा था, प्यार था उस पर आक्रमण किया, आपको कमज़ोर किया और फिर आपका स्टेटहुड ले लिया. जब आपका स्टेटहुड गया तो लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की शक्ति बढ़ी या घटी."
"आपको ये सवाल बीजेपी से पूछने चाहिए कि आप दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती की शक्तियों को नष्ट क्यों कर रहे हैं."
अलग-अलग धर्मों में हाथ के चिन्ह की तुलना कांग्रेस पार्टी के चिन्ह से करते हुए उन्होंने कहा कि हाथ का मतलब आशीर्वाद नहीं होता बल्कि “इसका मतलब होता है डरो मत, सच बोलने से डरो मत और इसीलिए कांग्रेस पार्टी बची है."
उन्होंने कहा कि “बीजेपी सच्चाई से डरती है, बीजेपी डर है.”

दशकों की शत्रुता के बाद 2015 में अमेरिका और क्यूबा के बीच राजनयिक संबंध बहाल किए गए थे. लेकिन महज़ दो साल के भीतर हवाना सिंड्रोम की वजह से दूतावास को लगभग बंद कर दिया क्योंकि कर्मचारियों की सलामती को ध्यान में रखते हुए उन्हें वहां से हटा लिया गया.
हवाना सिंड्रोम पहली बार क्यूबा में 2016 में सामने आया. सबसे पहले मामले सीआईए अधिकारियों के थे, लिहाज़ा उन्हें गुप्त रखा गया.
लेकिन बात बाहर निकल आई और फिर चिंता बढ़ गई. 26 लोगों और परिवारों ने विभिन्न प्रकार के इसके लक्षणों की रिपोर्ट की.
नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ें पूरी ख़बर..

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अफ़ग़ानिस्तान में पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसा में बढ़ोतरी पर रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (RSF) ने चिंता ज़ाहिर की है. गुरुवार को निजी समाचार चैनल टोलो न्यूज़ ने रिपोर्ट की थी कि पत्रकारों और रिपोर्टरों को अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने पीटा है.
RSF के अफ़ग़ानिस्तान डेस्क के प्रमुख रेज़ा मोइनी का कहना है कि 7 और 9 सितंबर को 48 घंटों के दौरान तालिबान ने 24 पत्रकारों को हिरासत में लिया था जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया.
तालिबान के सदस्य अनामुल्लाह समानगनी का कहना है कि तालिबान आगे भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचेंगे.

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उन्होंने कहा, “बीते कुछ दिनों में रिपोर्टर पीड़ित हुए हैं इसके लिए हम शर्मिंदा हैं. हम उनकी चुनौतियों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर मुजाहिदीनों ने उन्हें सुरक्षित जगह पर भेजा तो उसे हिरासत में बताया गया. हम इस पर भी काम करेंगे और कोशिश करेंगे कि उनसे सही तरीक़े से व्यवहार किया जाए.”
8 सितंबर को निजी अख़बार एतिलात-ए-रोज़ ने कहा था कि उसके पांच रिपोर्टरों को तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में महिलाओं का प्रदर्शन कवर करने पर हिरासत में लिया है. इसमें दावा किया गया था कि उसके दो रिपोर्टरों को तालिबान ने बुरी तरह पीटा था.

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देश के कुछ रिपोर्टरों का कहना है कि तालिबान ने उनके काम पर प्रतिबंध लगा दिया है.
चैनल ने 8 सितंबर को रिपोर्ट किया था कि हेरात शहर में हाल ही में तालिबान की गोलाबारी का शिकार हुए लोगों के परिवार न्याय के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं.

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भारत और इंग्लैंड के बीच मैनचेस्टर में खेले जाने वाला पाँचवां टेस्ट मैच कोविड-19 संक्रमण के कारण रद्द हो गया है.
बीबीसी टेस्ट मैच स्पेशल ने ट्वीट किया है कि ओल्ड ट्रैफ़र्ड स्टेडियम में शुक्रवार से पाँचवां और अंतिम टेस्ट मैच खेला जाना था लेकिन कैंप में कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने के डर के कारण मैच रद्द हो गया है.
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ICC ने बताया है कि BCCI और ECB ने आमसी सहमति से मैच रद्द करने की घोषणा की है.
ECB ने बयान जारी किया है, “BCCI के साथ बातचीत के बाद ECB पुष्टि करता है कि इंग्लैंड और भारत की पुरुष टीम का पाँचवां टेस्ट मैच जो आज से ओल्ड ट्रैफ़र्ड में खेला जाना था, वो रद्द हो गया है.”
“कैंप में कोविड केसों के बढ़ने के डर के कारण यह फ़ैसला लिया गया है, भारत खेदजनक रूप से अपनी टीम मैदान में उतारने पर असमर्थ है.”
“इस ख़बर के लिए हम अपने प्रशंसकों और साझेदारों से माफ़ी चाहते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि इससे कइयों को भारी निराशा और असुविधा होगी.”
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बुधवार को भारत के फ़िज़ियोथेरेपिस्ट योगेश परमार कोरोना संक्रमित पाए गए थे.
पांच मैचों की टेस्ट सिरीज़ में भारत 2-1 से आगे था.

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स्पिनर राशिद ख़ान के कप्तानी छोड़ने के बाद ऑलराउंडर खिलाड़ी मोहम्मद नबी को टी20 विश्व कप के लिए अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया है.
अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन 36 वर्षीय नबी ने ख़ुद ट्वीट करके बताया है कि उन्हें टी20 टीम की कप्तानी दी गई है.
उन्होंने ट्वीट में लिखा है कि ‘ऐसी नाज़ुक स्थिति में, मैंटी20 फॉर्मेट में राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के प्रतिनिधित्व के लिए चुने जाने पर ACB के फ़ैसले की सराहना करता हूँ. आगामी टी20 विश्व कप में हम राष्ट्र की एक बड़ी तस्वीर पेश करेंगे.’
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गुरुवार को राशिद ख़ान ने सबको चौंकाते हुए टीम की कप्तानी छोड़ दी थी. उन्होंने इसका तर्क यह दिया था कि टी20 विश्व कप के लिए राष्ट्रीय टीम चुने जाने पर उनकी राय नहीं ली गई थी.
ACB ने उनको 15 सदस्यीय टीम का कप्तान बनाया था लेकिन उन्होंने ट्वीट करके इसे छोड़ने की घोषणा की थी.
उनका कहना था कि कप्तान और एक देश का ज़िम्मेदार नागरिक होने के नाते उन्हें टीम की चयन प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार है.

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पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ प्रियंका टिबरीवाल को उम्मीदवार बनाया है.
पिछले सप्ताह केंद्रीय चुनाव आयोग ने 30 सितंबर को पश्चिम बंगाल की तीन विधानसभा सीटों पर उप-चुनाव की घोषणा की थी और वोटों की गिनती 3 अक्तूबर को होगी.

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इनमें भबानीपुर, जांगीपुर और समसेरगंज विधानसभा सीटें शामिल थीं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आम विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था जहां पर बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 1,956 वोटों से हराया था.
इसके बाद उपचुनाव के दौरान उन्होंने भबानीपुर सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की है.
बीजेपी ने जंगीपुर सीट से सुजीत दास और समसेरगंज सीट से मिलन घोष को उम्मीदवार बनाया है.